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भाई दूज 2018: भाई दूज शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और कथा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 9 2018 8:59AM IST
भाई दूज 2018: भाई दूज शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और कथा

(Bhai Dooj 2018) भाई दूज 2018:

भाई दूज यानि भईया दूज कार्तिक मास के द्वितीय तिथि को मनाई जाती है। इस साल 9 नवंबर, शुक्रवार को भाई दूज मनाया जा रहा है। भाई दूज पर बहनें अपने भाई को तिलक कर उनकी लम्बी उम्र और स्वास्थ्य की कामना करती है।

ऐसी मान्यता है कि भाई के लिए इस दिन व्रत रख, उनको तिलक करने के बाद भोजन करने वाली सभी बहनों के भाईयों को मृत्युपरांत भी कभी नरक लोक नहीं जाना पड़ता है। साथ ही ऐसा करने वाली बहनों को भी कभी यमदूत व यमराज की यातनाएं नहीं सहनी पड़ती है।

भाई दूज शुभ मुहूर्त (Bhai Dooj Shubh Muhurat 2018)

9 नवंबर 2018 - दोपहर 01:09 मिनट से 03:17 मिनट तक

भाई दूज पूजा विधि (Bhai Dooj Puja Vidhi)

  • भाई दूज के दिन बहनें लकड़ी के आसन अरवा चावल को पीसकर बनाए घोल से चौक बनाएं।
  • फिर रोली, चंदन, घी का दीपक, फूल और मिठाई से थाल सजाएं। 
  • कद्दू का ताजा फूल, पान का पत्ता, सुपारी चरखा का सूट इत्यादि को पीतल के बर्तन में रखें।
  • अब भाई को लकड़ी का आसन यानि पीढ़िया पर बैठने को कहें। 
  • भाई के दोनों हाथों को वैसे देखने को कहें जैसे सुबह उठकर हाथ देखते है। 
  • अब हाथों के बीचों में पान, सुपारी, चारखा का सूत इत्यादि को रखें।

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  • भाई के दोनों हाथों के अंगूठे पर अरवा चावल के पीसे भोल को लगाएं।
  • पानी से भाई के हाथों को धोएं ऐसा क्रमशः तीन बार करें।
  • भाई के माथे पर नीचे लिखें मंत्र को पढ़ते हुए तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना करें।
  • फिर रोली, चंदन, घी का दीपक, फूल और मिठाई से थाल सजाएं।
  • कद्दू का पीला और ताजा फूल, पान का पत्ता, सुपारी चरखा का सूट इत्यादि को किसी पीतल का कटोरानुमा बर्तन में रखें।
  • अब भाई को लकड़ी का आसन यानि पीढ़िया पर भाई को बैठने को कहें।
  • फिर भाई के दोनों हाथ जैसे सुबह उठकर हाथ देखते हैं वैसा ही बनाने को कहें।
  • अब हाथों के बीचों में पान, सुपारी, चारखा का सूत इत्यादि को रखें।
  • भाई के दोनों हाथों के अंगूठे पर अरवा चावल के पीसे भोल को लगाएं।
  • पानी से भाई के हाथों को धोएं ऐसा क्रमशः तीन बार करें।
  • फिर भाई के माथे पर तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना करें।
  • भाई बहन को कोई उपहार दें।

भाई दूज मंत्र (Bhai Dooj Mantra)

गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को।

सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें।।

भाई दूज पूजा सामग्री (Bhai Dooj Puja Samagri)

  1. आरती की थाली
  2. तिलक (लाल रंग)
  3. चावल के बिना टूटे दानें
  4. एक साबूत श्रीफल (नारियल)
  5. कलावा
  6. दूब घास
  7. मिठाई
  8. केले- इन्हें शुभता का प्रतीक माना जाता है।

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भाई दूज कथा (Bhai Dooj Katha)

भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो।

अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं।

मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया।

यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे।

यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।


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