logo
Breaking

भाई दूज के दिन क्यों किया जाता है तिलक, जानें इसका महत्व

हिन्दू धर्म शास्त्रों में भी माथे पर तिलक लगाने का महत्व बताया गया है। दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज (Bhai Dooj) कर पर्व मनाया जाता है। इस बार भाई दूज का पर्व 9 नवंबर 2018, को है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को बहन अपने भाई की सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत पूरे दिन का नहीं बल्कि भाइयों के माथे पर तिलक लगाने तक का होता है।

भाई दूज के दिन क्यों किया जाता है तिलक, जानें इसका महत्व

हिन्दू धर्म शास्त्रों में भी माथे पर तिलक लगाने का महत्व बताया गया है। दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज (Bhai Dooj) कर पर्व मनाया जाता है। इस बार भाई दूज का पर्व 9 नवंबर 2018, को है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को बहन अपने भाई की सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत पूरे दिन का नहीं बल्कि भाइयों के माथे पर तिलक लगाने तक का होता है।

भारतीय परंपरा में माथे पर तिलक लगाने का महत्व या टीका लगाना अनिवार्य धर्मकृत्य है। धर्मकृत्यों के नियामक ऋषियों के साथ वैज्ञानिक भी थे और दार्शनिक भी। इसलिए किसी भी प्रचलन की स्थापना में दोनों दृष्टियों को ध्यान में रखा गया। तिलक हमेशा भ्रूमध्य या आज्ञाचक्र के स्थान पर लगाया जाता है।

Bhai Dooj 2018: भैया दूज पर भेजें ये शायरी, बधाई संदेश और शुभकामनाएं

शरीर शास्त्र की दृष्टि से यह स्थान पीनियल ग्रंथि का है। प्रकाश से इसका गहरा संबंध है। एक प्रयोग में जब किसी की आंखों पर पट्टी बांधकर, सिर को ढक दिया गया और उसकी पीनियल ग्रंथि को उद्दीप्त किया गया, तो उसे मस्तक के भीतर प्रकाश की अनुभूति हुई।

ध्यान-धारणा के समय साधक के चित्त में जो प्रकाश अवतरित होता है, उसका संबंध इस स्थूल अवयव से अवश्य है। दोनों भौंहों के बीच कुछ संवेदनशीलता होती है।

Bhai Dooj 2018: भाई दूज शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और प्राचीन महत्व

यदि हम आंखें बंद करके बैठ जाएं और कोई व्यक्ति भ्रूमध्य के निकट ललाट की ओर तर्जनी उंगुली ले जाए, तो कुछ विचित्र अनुभव होगा।

यही तृतीय नेत्र की प्रतीति है। इसे अपनी उंगुली भृकुटि-मध्य लाकर भी अनुभव कर सकते हैं। इसलिए जब यहां तिलक या टीका लगाया जाता है, तो उससे आज्ञाचक्र को नियमित स्फुरण मिलती रहती है।

Share it
Top