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बसंत पंचमी 2019: सरस्वती पूजा विधि - मंत्र

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Feb 9 2019 12:18PM IST
बसंत पंचमी 2019: सरस्वती पूजा विधि - मंत्र
बसंत पंचमी 2019 की तारीख को लेकर बहुत से संदेह है। बहुत से लोगों को नहीं पता की बसंत पंचमी 2019 कब है (Basant Panchmi 2019 Kab Hai)। तो हम आपको बता दें कि बसंत पंचमी 2019 शनिवार और रविवार यानी 9 फरवरी और 10 फरवरी को है। देश के कुछ हिस्सों में बसंत पंचमी आज मनाई जा रही है। तो वहीं देश के कुछ हिस्सों में रविवार को मनाया जाएगा।
आज हम आपको बता रहे हैं कि बसंत पंचमी के दिन पूजा कैसे की जाती है। बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के दिन मां सरस्वती की पूजा (Saraswati Puja) की जाती है। इस दिन को मां सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। कई कथाओं में से एक कथा यह भी है कि ब्रह्मा जी ने सरस्वती की रचना बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के दिन की थी। जब सरस्वती प्रकट हुईं तो उनके एक हाथ में वीणा थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें वीणा बजाने को कहा जिसके बाद संसार की हर चीज में स्वर आ गया। जिसके बाद ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती को वाणी की देवी नाम दिया। मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला की देवी भी कहा जाता है। बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के दिन मां सरस्वती की खास पूजा होती है। जिसकी विधि इस प्रकार है।
 
  • बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिए एक आसन बनाएं जिस पर उनकी प्रतिमा रखें। 
  • कलश की स्थापना करें और भगवान गणेश का नाम लेकर पूजा करें।
  • पूजा शुरू करने से पहले मां सरस्वती (Saraswati) को आचमन करें और उन्हें स्नान कराएं। 
  • मां सरस्वती को पूजा (Saraswati Puja) में मां सरस्वती को पीले रंग के फूल चढ़ाएं, और श्रंगार करें। 
  • माता के चरणों में गुलाल अर्पित करें। 
  • माता सरस्वती को पीले फल या फिर मौसमी फलों के साथ बूंदी चढ़ाएं। 
  • मां सरस्वती को मालपुए और खीर का भोग लगाएं। 
  • मां सरस्वती ज्ञान और वाणी की देवी हैं, पूजा के समय वाद्ययंत्रों का भी पूजन करें।
  • कई लोग मां सरस्वती का हवन करते हैं। अगर आप भी हवन करने की इच्छा रखते हैं तो हवन करने के साथ 'ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा" मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • मां सरस्वती वंदना मंत्र का जाप करें।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता 
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। 
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता 
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥ 
 
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं 
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌। 
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌ 
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥२॥

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