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Basant Pachmi 2019: बसंत पंचमी का मुहूर्त, महत्व और सरस्वती पूजन

अगर आपको नहीं पता कि बसंत पंचमी 2019 कब है (Basant Panchmi 2019 kab hai)। तो जान लीजिए कि बसंत पंचमी 2019 (Basant Panchmi 2019) फरवरी की 9 और 10 दोनो ही तारीखों को है। दोनों ही दिन बसंत पंचमी (Basant Panchmi) मनाया जाएगा। आज हम आपको बता रहे हैं बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के बारे में सबकुछ।

Basant Pachmi 2019: बसंत पंचमी का मुहूर्त, महत्व और सरस्वती पूजन
अगर आपको नहीं पता कि बसंत पंचमी 2019 कब है (Basant Panchmi 2019 kab hai)। तो जान लीजिए कि बसंत पंचमी 2019 (Basant Panchmi 2019) फरवरी की 9 और 10 दोनो ही तारीखों को है। दोनों ही दिन बसंत पंचमी (Basant Panchmi) मनाया जाएगा। आज हम आपको बता रहे हैं बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के बारे में सबकुछ।

विद्यारंभ करने का शुभ दिन है बसंत पंचमी

बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को पड़ता है। ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में वसंत पंचमी मनाया जाता है। इस मौके पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है। और मौसम में आसानी से उलब्ध होने वाले फूल चढ़ाए जाते हैं।
इस दिन विद्यार्थी कॉपी-किताब और पाठ्य सामग्री की पूजा करते हैं। जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच रहती है उस दिन सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन को पढ़ाई की शुरुआत के लिए भी अच्छा समझा जाता है। कई जगहों पर बच्चों से पहला अक्षर भी लिखवाया जाता है।

बसंत पंचमी है अबूझ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बसंत पंचमी एक अबूझ मुहूर्त है। इस कारण से नए कार्यों को शुरुआत के लिए यह दिन उत्तम समझा जाता है। इस दिन मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा, घर की नींव, गृह प्रवेश, वाहन खरीदने, व्यापार शुरू करने आदि के लिए शुभ है। इस दिन अन्नप्राशन भी किया जा सकता है।

बसंत पंचमी की पौराणिक मान्यताएं

बसंत पंचमी को लेकर मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन उनकी आराधना की जाए। तब से बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के पूजन की परंपरा चली आ रही है। खास कर विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है।
एक अन्य मान्यता के मुताबिक मां सीता की तलाश करते हुए भगवान श्रीराम गुजरात और मध्य प्रदेश में फैले दंडकारण्य इलाके में पहुंचे। यहां वह शबरी से मिले। यहां के लोग आज भी वहां मौजूद शिला का पूजन करते हैं। मान्यता है कि भगवान राम इसी शिला पर बैठे थे।
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