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ये है सम्पूर्ण वन्दे मातरम्, जिसे आप अब तक नहीं जानते होंगे

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय प्रख्यात कवि, उपन्यासकार, गद्यकार और पत्रकार थे। इन्होंने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की रचना की थी।

ये है सम्पूर्ण वन्दे मातरम्, जिसे आप अब तक नहीं जानते होंगे

राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 को नैहाटी पश्चिम बंगाल में हुआ था। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय प्रख्यात कवि, उपन्यासकार, गद्यकार और पत्रकार थे।

भारत का बच्चा-बच्चा जानता है कि राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् की रचना बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने की थी। राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् संस्कृत और बांग्ला दोनों भाषाओं का मिश्रण है।

यह वन्दे मातरम् गीत सर्वप्रथम आनंद मठ नामक उपन्यास में वर्ष 1882 में छपा था। वन्दे मातरम् गीत सबसे पहले भवानंद नाम के सन्यासी द्वारा गाया गया था। आज भी सम्पूर्ण वन्दे मातरम् से लाखों लोग अनभिज्ञ हैं। तो जानते हैं क्या सम्पूर्ण वन्दे मातरम्-

वंदे मातरम्‌ ।

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्‌

स्यश्यामलां मातरम्‌ ।

शुभ्रज्योत्‍स्‍नापुलकितयामिनीं

फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं

सुखदां वरदां मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।

कोटि-कोटि-भुजैधृत-खरकरवाले।

अबला केन मा एत बले ।

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं

रिपुदलवारिणीं मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

तुमि विद्या, तुमि धर्म

तुमि हृदि, तुमि मर्म

त्वं हि प्राणाः शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति

हृदये तुमि मा भक्ति

तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्‌।

वंदे मातरम्‌॥

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदलविहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नामामि त्वाम्‌

कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम्‌।

वंदे मातरम्‌ ॥

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां

धरणीं भरणीं मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

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