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Amalaki Ekadashi 2019 : आमलकी एकादशी पूजा विधि, महत्व, शुभ मुहूर्त और आमलकी एकादशी व्रत कथा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 12 2019 3:59PM IST
Amalaki Ekadashi 2019 : आमलकी एकादशी पूजा विधि, महत्व, शुभ मुहूर्त और आमलकी एकादशी व्रत कथा
Amalaki Ekadashi 2019 : आमलकी एकादशी 2019 (Amalaki Ekadashi 2019) को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी (Ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी का साल में आने वाली सभी एकादशियों में बहुत ही खास महत्व है। हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के मुताबिक, आमलकी एकादशी 17 मार्च 2019 रविवार (Amalaki Ekadashi 17 March 2019 Sunday) के दिन होगी। 

आमलकी एकादशी का महत्व (Amalaki Ekadashi Importance)

सबसे पहले बात करते हैं आमलकी का मतलब क्या होता है। आमलकी का अर्थ आंवला होता है और एकादशी का व्रत पुण्य संचय करने में सहायक होता है। इसलिए जब आमलकी एकादशी आती है। तो इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। पुराणों के मुताबिक, आमलकी एकादशी का व्रत करने से पुण्य मिलता है। एकादशी के विषय में कई जगहों पर इसका विशेष वर्णन है। कहते हैं कि जब सृष्टि का आरंभ हुआ तो सबसे पहले आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। जिसकी वजह से सबसे पहले आमलकी एकादशी का त्योहार मनाया जाता है और भगवान विष्णु के साथ आवंले के वृक्ष की भी पूजा हो जाती है।

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास

पद्म पुराण में कहा गया है कि आंवले के वृक्ष के नीछे भगवान विष्णु का वास है जैसे कहते है कि पीपल के पेड़ पर शनिवार को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी वास करते हैं। भगवान विष्णु यह जगह अत्यंत प्रिय है। इसी वजह से यहां पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। इतना ही नहीं पूजा के बाद आंवले का उबटन, आंवले के जल से स्नान, आंवला पूजन, आंवले का भोजन और आंवले का दान करना चाहिए। किसी ना किसी रूप में आंवले का होना जरूरी है।
 
इस एकादशी का सभी 12 एकादशियों में सबसे ज्यादा महत्व है। आमलकी एकादशी को आमलक्य एकादशी भी कहा जाता है। बता दें हिन्दू धर्म और आयुर्वेद दोनों में आंवले को श्रेष्ठ बताया है।

आमलकी एकादशी पूजा विधि

आमलकी एकादशी में भगवान विष्णु जी की पूजा होती है। आंवले के वृत के नीचे आंवले और विष्णु भगवान की पूजा होती है। इस दिन लोग ‘आमलकी एकादशी व्रत’ रखते हैं। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से समस्त पापों का विनाश हो जाता है। जो फल सौ गायों को दान करने से मिलता है वो इस व्रत को करने से मिल जाता है। यह भी कहा जाता है कि आवलें के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से हुई थी इसलिए आवलें के वृक्ष की पूजा इस दिन की जाती है।
 
इतना ही नहीं आमलकी एकादशी व्रत के समापन की भी विधि है। इसे करने के बाद ही पूरा व्रत सम्मपन होता है। व्रत के अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के पश्चात किया जाता है। इस दौरान एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले होना जरुरी है। लेकिन यदि द्वादशी को सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए। तभी इस व्रत को पूर्ण माना जाता है। 
 
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आमलकी एकादशी 2019 व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त

आमलकी एकादशी - 17 मार्च 2019 (रविवार)
 
एकादशी तिथि प्रारम्भ -   23:33 बजे (16 मार्च 2019)
एकादशी तिथि समाप्त -  20:51 बजे (17 मार्च 2019)
 
पारण का समय (व्रत तोड़ने का समय) - सुबह 6:32 से 8:55 बजे तक (18 मार्च 2019)
द्वादशी समापन समय - शाम 5:43 बजे (18 मार्च 2019)
 

आगे की स्लाइड्स में जानिए आमलकी एकादशी व्रत कथा...


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