15 April 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 15 अप्रैल 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज बैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
तिथि और नक्षत्र
त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है, खासकर प्रदोष काल में। नक्षत्र की बात करें तो पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र दोपहर 3:23 बजे तक रहेगा। यह नक्षत्र आध्यात्मिक कार्यों, ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र शुरू होगा।
योग
इस दिन ब्रह्म योग दोपहर 1:25 बजे तक रहेगा। ब्रह्म योग को शुभ और ज्ञानवर्धक योग माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में स्थिरता और सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है।
व्रत और धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत- यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और संध्या समय में पूजा करने का विशेष महत्व है।
मासिक शिवरात्रि- हर महीने आने वाली शिवरात्रि, जिसमें रात्रि में शिव पूजा और जागरण का विशेष महत्व होता है।
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 से 5:36 तक- ध्यान और पूजा के लिए श्रेष्ठ समय
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:44 से 3:35 तक- किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए अच्छा
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:55 से 7:18 तक- पूजा और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल
- निशिता मुहूर्त: रात 12:15 से 1:01 (16 अप्रैल)- विशेष रूप से शिव पूजा के लिए उत्तम
प्रदोष पूजा का समय
प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय शाम 6:56 से 9:13 तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
राहुकाल
- दिल्ली: 12:21 से 1:58
- मुंबई: 12:39 से 2:13
- लखनऊ: 12:07 से 1:43
- भोपाल: 12:20 से 1:56
- कोलकाता: 11:37 से 1:12
- चेन्नई: 12:09 से 1:42
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 5:54 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:46 बजे
15 अप्रैल 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। त्रयोदशी तिथि, ब्रह्म योग और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का संयोग इसे पूजा-पाठ और साधना के लिए उत्तम बनाता है। विशेष रूप से प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि के कारण यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। यदि इस दिन सही मुहूर्त में पूजा और उपवास किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।