13 April 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल 2026, सोमवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज बैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जो रात 1 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
व्रत का महत्व
आज के दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे। वरुथिनी एकादशी का व्रत विशेष रूप से जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से व्रत करता है, उसे विष्णु कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
शुभ योग और नक्षत्र
13 अप्रैल को शाम 5 बजकर 17 मिनट तक शुभ योग रहेगा, जो किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। वहीं धनिष्ठा नक्षत्र शाम 4 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। यह नक्षत्र धन, वैभव और प्रगति से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
पंचक का प्रभाव
इस दिन पंचक की शुरुआत भी हो रही है। पंचक को ज्योतिष में विशेष सावधानी का समय माना जाता है। इस दौरान कुछ कार्य जैसे निर्माण, लकड़ी से जुड़े काम या दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
राहुकाल का समय
- दिल्ली: सुबह 07:34 से 09:10 तक
- मुंबई: सुबह 07:57 से 09:31 तक
- चंडीगढ़: सुबह 07:35 से 09:11 तक
- लखनऊ: सुबह 07:21 से 08:56 तक
- भोपाल: सुबह 07:36 से 09:11 तक
- कोलकाता: सुबह 06:53 से 08:28 तक
- अहमदाबाद: सुबह 07:56 से 09:31 तक
- चेन्नई: सुबह 07:31 से 09:04 तक
सूर्योदय और सूर्यास्त
13 अप्रैल 2026 को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 45 मिनट पर होगा। दिन की कुल अवधि लगभग 12 घंटे 49 मिनट रहेगी, जो कि ग्रीष्म ऋतु की ओर बढ़ते समय का संकेत है।
वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
वरुथिनी एकादशी का व्रत विशेष रूप से कष्टों से मुक्ति और जीवन में स्थिरता लाने वाला माना गया है। “वरुथिनी” शब्द का अर्थ होता है “रक्षा करने वाली”, यानी यह व्रत व्यक्ति को हर प्रकार के संकट से बचाने का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और दान-पुण्य करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र या जल का दान करना विशेष पुण्यदायक माना गया है।
क्या करें और क्या न करें
इस दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक आहार या फलाहार ग्रहण करें और मन में सकारात्मकता बनाए रखें। झूठ बोलने, क्रोध करने और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। साथ ही राहुकाल और पंचक के समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
13 अप्रैल 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वरुथिनी एकादशी, शुभ योग और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग इस दिन को और भी खास बना रहा है। यदि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत एवं पूजा की जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त हो सकती है।