11 February 2026 Ka Panchang: यहां पढ़ें बुधवार (11 फरवरी 2026) फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि का पंचांग, शुभ मुहूर्त, तिथि शुभ योग; नक्षत्र और राहुकाल।

11 February 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 फरवरी 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज के दिन फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है, जो सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमीं तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।

आज की तिथि और वार

  • तिथि: कृष्ण पक्ष नवमी (सुबह 09:58 बजे तक)
  • वार: बुधवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष

सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्रमा की स्थिति

  • सूर्योदय: प्रातः 07:03 बजे
  • सूर्यास्त: सायं 06:09 बजे
  • चंद्रोदय: 12 फरवरी को प्रातः 03:12 बजे
  • चंद्रास्त: दोपहर 12:29 बजे

नक्षत्र, करण और योग

  • नक्षत्र: अनुराधा (सुबह 10:53 बजे तक)
  • करण: गर करण – सुबह 09:58 बजे तक, वणिज करण – रात्रि 11:12 बजे तक
  • योग: व्याघात योग (12 फरवरी को रात्रि 02:30 बजे तक)

हिन्दू पंचांग विवरण

  • शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
  • विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
  • गुजराती संवत: 2082 (पिंगल)
  • चंद्र मास: पूर्णिमांत – फाल्गुन, अमांत – माघ

आज के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:20 से 06:12 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:12 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:07 से 06:33 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: 12 फरवरी को रात्रि 12:10 से 01:02 बजे तक
  • अमृत काल: 12 फरवरी को प्रातः 03:52 से 05:39 बजे तक

विशेष योग

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 07:03 से 10:53 बजे तक
  • अमृत सिद्धि योग: प्रातः 07:03 से 10:53 बजे तक

आज के अशुभ मुहूर्त (Ashubh Muhurat)

  • राहुकाल: दोपहर 12:36 से 02:00 बजे तक
  • यमगण्ड: प्रातः 08:27 से 09:50 बजे तक
  • गुलिक काल: 11:13 से 12:36 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: 12:14 से 12:58 बजे तक
  • भद्रा: रात्रि 11:12 बजे से 12 फरवरी को प्रातः 07:03 बजे तक

आज का संदेश
11 फरवरी 2026 का दिन शुभ योगों के कारण धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष फलदायी है। यदि आप किसी नए कार्य की योजना बना रहे हैं, तो सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का लाभ अवश्य उठाएं। वहीं, राहुकाल और भद्रा काल में धैर्य रखना ही श्रेष्ठ माना जाएगा।