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ईश्वर का पूजन करते समय आंखों में आने वाले आंसू के ये संकेत, आप भी जाने

कई बार विद्यार्थी पढ़ाई करते समय मां सरस्वती का ध्यान करते हैं। तो उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। अथवा उन्हें अचानक से नींद आ जाती है। इसका अर्थ है कि मां सरस्वती की कृपा उस विद्यार्थी पर बन रही है। इसके साथ ही हम कभी ईश्वर से जुड़ी कोई कथा आदि सुनते हैं। तो हमारे शरीर का रोम-रोम खड़ा हो जाता है। मन प्रफूल्लित हो जाता है। और आंखों से आंसू आ जाते हैं। ईश्वर की उस अनंत शक्ति का अनुभव करते हुए कभी-कभी हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। तो ईश्वर पर हमारा विश्वास दृढ होने लगता है। तो आइए जानते हैं कि पूजा के दौरान आपकी आंखों में आने वाले आंसूओं के क्या हैं संकेत।

ईश्वर का पूजन करते समय आंखों में आने वाले आंसू के ये संकेत, आप भी जाने
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ईश्वर का पूजन

कई बार विद्यार्थी पढ़ाई करते समय मां सरस्वती का ध्यान करते हैं। तो उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। अथवा उन्हें अचानक से नींद आ जाती है। इसका अर्थ है कि मां सरस्वती की कृपा उस विद्यार्थी पर बन रही है। इसके साथ ही हम कभी ईश्वर से जुड़ी कोई कथा आदि सुनते हैं। तो हमारे शरीर का रोम-रोम खड़ा हो जाता है। मन प्रफूल्लित हो जाता है। और आंखों से आंसू आ जाते हैं। ईश्वर की उस अनंत शक्ति का अनुभव करते हुए कभी-कभी हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। तो ईश्वर पर हमारा विश्वास दृढ होने लगता है। तो आइए जानते हैं कि पूजा के दौरान आपकी आंखों में आने वाले आंसूओं के क्या हैं संकेत।

अपने आराध्य की पूजा करते समय क्या आपकी आंखों से आंसू आना कोई साधारण बात नहीं है, ये आपके लिए बहुत बड़ी बात है। कहा जाता है कि बिना प्रीति या प्रेम के आराधना नहीं होती। जब तक आपमें अपने आराध्य के प्रति प्रेम और समर्पण नहीं है, तब तक आपके आराध्य की भी आपको कृपा प्राप्त नहीं हो सकती है।

पौराणिक गंथों के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इस ब्रह्मांड खाली था। जिसके बाद अचानक ही एक विशालकाय शिवलिंग प्रकट हुआ। उसके बाद यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड ऊर्जा से भर गया। उसके कुछ समय बाद इस ब्रह्मांड में पदार्थ का निर्माण हुआ। जिसमें धातु, वायु, जल और अग्नि जैसी कई चीजों का निर्माण हुआ। इसी कारण यह माना जाता है कि इन सभी चीजों में भगवान शिव का वास है।

समस्त ब्रह्मांड के कण-कण में बसी हुई ऊर्जा मानों शिव ही है। शिव ही आदि हैं और शिव ही अनंत हैं। तो इसलिए जब भी आप पूजा पाठ करने बैठ जाते हैं तो आपकी आत्मा का कनेक्शन ईश्वर के साथ हो जुड जाता है। ईश्वर सर्वव्यापी है। समस्त सजीव और निर्जीव चीजों में ईश्वरीय शक्ति का वास होता है। इसी कारण जब आपकी अंतर आत्मा का ईश्वर के साथ मन जुड़ जाता है, तो ईश्वर आपको कुछ संकेत देते हैं। यह संकेत बड़े ही साधारण होते हैं। और हम इन संकेतों को समझ नहीं पाते।

सर्वव्यापी परमात्मा सभी जीव-जन्तुओं की आत्मा से जुड़ा हुआ है। जब भी हम पूजा या ध्यान करते हैं। तो हमारे आसपास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। और इसी कारण से हमें प्रसन्नता महसूस होती है। दुख का माहौल भी खुशी में बदल जाता है। आप कितने भी दुख में क्यों न हों। आपको अच्छा और फ्रेस महसूस होने लग जाता है। क्योंकि इन सकारात्मक शक्तियों का प्रभाव भी कुछ ऐसा होता है।

अगर आप ईश्वर की आराधना में ध्यान लगा कर बैठे हैं, तो इसका संकेत है कि आपकी आत्मा का ईश्वरीय शक्ति के साथ मिलन हो चुका है। ऐसे समय में ईश्वर को अपनी मनोकामना अवश्य बताएं। ऐसे समय पर ईश्वर से की हुई हर प्रार्थना का फल अवश्य मिलता है। अधिकतर लोग इसे संयोग समझकर इस पर ध्यान नहीं देते। और बस ईश्वर की आराधना में खो जाते हैं। परंतु यह ईश्वर से कुछ मांगने का सर्वेत्तम समय होता है। जब भी आप पूजा करें और आपकी आंखों में आंसू आ जाएं तो आप ईश्वर से अपने जीवन के कष्टों के निवारण के लिए प्रार्थना करें।

साथ ही पूजा के समय आंखों में आंसू आने का यह भी कारण माना जाता है कि आपके अंतर मन की बुराई की सफाई हो रही है। और आपका अंत:करण शुद्ध हो रहा है।

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