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इंसान के मरने के बाद उसकी अंतिम यात्रा में क्यों बोलते है 'राम नाम सत्य है', जानिए ये बड़ी वजह

कलयुग में राम नाम और भोले बाबा के नाम की महिमा अपरंपार है। कलयुग के विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में साक्षात कहा है कि, भगवान का नाम ही कलयुग में सबसे बड़ा त्राण है अर्थात रक्षा करने वाला है। इसीलिए कलयुग में नाम जप की खास अहमियत है। राम का नाम और भोलेनाथ का नाम ही ये ऐसा जो जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी मनुष्य के साथ रहता है। इस नश्वर संसार में कोई भी जीव अमर नहीं है। सभी जीव मरणशील हैं।

इंसान के मरने के बाद उसकी अंतिम यात्रा में क्यों बोलते है
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कलयुग में राम नाम और भोले बाबा के नाम की महिमा अपरंपार है। कलयुग के विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में साक्षात कहा है कि, भगवान का नाम ही कलयुग में सबसे बड़ा त्राण है अर्थात रक्षा करने वाला है। इसीलिए कलयुग में नाम जप की खास अहमियत है। राम का नाम और भोलेनाथ का नाम ही ये ऐसा जो जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी मनुष्य के साथ रहता है। इस नश्वर संसार में कोई भी जीव अमर नहीं है। सभी जीव मरणशील हैं।

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सभी पैदा होने वाले जीवों को एक दिन इस दुनिया से विदा लेना ही पड़ता है। ईश्वर का नाम लेने से जहां जीवन की समस्याएं सरल हो जाती हैं, वहीं आयु पूरी होने के पश्चात मनुष्य की अंतिम यात्रा के समय भी आप गौर किया होगा कि, राम नाम साथ चलता है।

हमारे सनातन धर्म में किसी भी मनुष्य की अंतिम यात्रा के चलते लोग रास्ते भर 'राम नाम सत्य' बोलते हैं। क्या आपको पता है ऐसा क्यों किया जाता है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा रहस्य छिपा हुआ है।

जीवनभर मनुष्य पैसा , जमीन-जयादाद, पैसा, पद, प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए दौड़ता है और चारों ओर भागा फिरता है। अपना काम बनाने के लिए व्यक्ति छल-कपट करता है, मगर मरने के बाद सबकुछ यहीं पर छोड़कर जाना पड़ता है।

हिन्दू मान्यता के मुताबिक , मनुष्य के साथ उसके कर्मों का हिसाब जाता है। इसी आधार पर उसकी मुक्ति अथवा किसी और योनि में जन्म प्राप्त होता है।

वहीं इंसान जहां जन्म लेता है तो उसे वहां के नियमों को मानना पड़ता है। उम्र यानि पूरी आयु के पश्चात मनुष्य की आखिरी यात्रा के समय ईश्वर का नाम यानी 'राम नाम' ही उसका साथ देता है।

कहा जाता है कि, इस बात का उल्लेख महाभारत में पांडवों के सबसे बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर ने किया था कि, मृतक को श्मशान ले जाते वक्त लोग 'राम नाम सत्य है' तो बोलते हैं, लेकिन शवदाह करने के पश्चात घर लौटते ही सभी लोग इस राम नाम को भूलकर फिर से माया मोह में पड़ जाते हैं। मनुष्य मृतक के पैसे, घर इत्यादि को बंटबारा को लेकर चिंतित हो जाता है और संपत्ति को लेकर लड़ने लगता है।

इसी पर धर्मराज युधिष्ठिर ने यह भी बताया है कि, नित्य ही प्राणी मरते हैं मगर आखिर में परिवार वाले उसकी संपत्ति को चाहते हैं, इससे बढ़कर आश्चर्य भला क्या होगा। इसलिए इस कलयुग में आपको अपने जीवन से त्राण अर्थात मोक्ष पाना है तो राम नाम का सहारा ही एक उचित सहारा है। इसलिए राम नाम के सहारे ही आप अपने जीवन के लक्ष्य को भी पाइए साथ ही उस नाम को भी ना भूलिए।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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