Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

When Is Shitla Satam 2020 Date : शीतला सातम 2020 में कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा

When Is Shitla Satam 2020 Date : शीतला सातम की दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है। इस दिन ताजी भोजन पकाना निषेध माना जाता है। माता शीतला को रोगों की देवी माना जाता है। जो भी व्यक्ति इस दिन माता शीतला की विधिवत पूजा करता है तो उसे और उसके परिवार को किसी भी प्रकार के भयानक रोग नहीं सताते तो चलिए जानते हैं शीतला सातम 2020 में कब है (Shitla Satam 2020 Mein Kab Hai),शीतला सातम का शुभ मुहूर्त (Shitla Satam Shubh Muhurat), शीतला सातम का महत्व (Shitla Satam Ka Mahatva), शीतला सातम की पूजा विधि (Shitla Satam Puja Vidhi) और शीतला सातम की कथा (Shitla Satam Story)

When Is Shitla Satam 2020 Date : शीतला सातम 2020 में कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा
X
When Is Shitla Satam 2020 Date : शीतला सातम 2020 में कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा

When Is Shitla Satam 2020 Date : शीतला सातम (Shitla Satam ) के दिन माता शीतला की पूजा (Goddess Shitla Puja) की जाती है। यह पर्व विशेष रूप से गुजरात में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है तो चलिए जानते हैं शीतला सातम 2020 में कब है, शीतला सातम का शुभ मुहूर्त, शीतला सातम का महत्व, शीतला सातम की पूजा विधि और शीतला सातम की कथा।


शीतला सातम 2020 तिथि (Shitla Satam 2020 Tithi)

10 अगस्त 2020

शीतला सातम 2020 शुभ मुहूर्त (Shitla Satam 2020 Shubh Muhurat)

शीतला सातम पूजा मुहूर्त - सुबह 6 बजकर 42 मिनट से शाम 07 बजकर 05 मिनट तक (10 अगस्त 2020)

सप्तमी तिथि प्रारम्भ - सुबह 06 बजकर 42 मिनट से (10 अगस्त 2020)

सप्तमी तिथि समाप्त - अगले दिन सुबह 09 बजकर 06 मिनट तक (11 अगस्त 2020)


शीतला सातम का महत्व (Shitla Satam Importance)

शीतला सातम गुजराती कैलेंडर में महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन गुजरात में माता शीतला की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन जो भी माता शीतला की विधिवत पूजा करता है उसे और उसके परिवार को माता शीतला खसरा और चेचक जैसे भयानक रोगों से बचाती हैं। इसलिए गुजरात में लोग अपने परिवार के साथ माता शीतला का आशीर्वाद लेने के लिए शीतला सातम के अनुष्ठान का पालन करते हैं।

शीतला सातम के दिन ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। शीतला सातम के दिन माता शीतला की पूजा ठंडे और बासी भोजन से की जाती है और उसी भोजन को ग्रहण किया जाता है। इसलिए लोग शीतला सातम से एक दिन पहले ही भोजन बना लेते हैं और माता शीतला की पूजा करने के बाद इसे ही ग्रहण करते हैं। शीतला सातम को रंधन छठ के नाम से भी जाना जाता है।


शीतला सातम पूजा विधि (Shitla Satam Puja Vidhi)

1.शीतला सातम से एक दिन पहले ही सप्तमी के दिन मीठा भात, खाजा, चूरमा, कच्चा और पक्का खाना,नमक पारे, बेसन की पकौड़ी आदि बना लेनी चाहिए। यह सभी समान बनाकर आपको अगले दिन यानी शीतला सातम की पूजा में रखना है और यदि आप रोटी बना रहे हैं तो ऐसी रोटी बनाएं जिसमें लाल रंग के सिकाई के निशान न हो।

2.शीतला सातम के दिन यानी शीतला सातम के दिन ठंडे पानी से नहाएं और साफ वस्त्र धारण करें।

3.इसके बाद एक थाली में रबड़ी, चावल, पुए,पकौड़े और कच्चा पक्का खाना रखें।

4.यह खाना रखने के बाद एक दूसरी थाली में काजल, रोली,चावल, मौली, हल्दी और एक रूपए का सिक्का रखें।

5. इसके बाद बिना नमक का आंटा गूथकर उससे एक दीपक बनाएं और उसमें रूई की बाती घी में डुबोकर लगाएं।

6. यह दीपक बिना जलाए ही माता शीतलो चढ़ा दें। पूजा की थाली से घर के सभी सदस्यों को रोली और हल्दी से टिका लगाएं।

7.इसके बाद मंदिर में जाकर पूजा करें या शीतला माता घर हो तो सबसे पहले माता को स्नान कराएं।

8.माता को स्नान कराने के बाद उन्हें रोली और हल्दी का टीका लगाएं।

9. इसके बाद माता शीतला को मेहंदी, लच्छा और वस्त्र आदि अर्पित करें और आटें का दीपक बिना जलाएं माता शीतला के आगे रख दें।

10.अंत में माता शीतला को भोग लगाकर उनकी आरती करें और माता शीतला को जल अर्पित करें और थोड़ा सा जल बचाकर अपने घर के मुख्य द्वार पर और अपने घर के सभी सदस्यों पर छिड़कें।


शीतला सातम की कथा (Shitla Satam Story)

शीतला सातम की कथा के अनुसार एक बार एक बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता अष्टमी का व्रत रखा। जिसमें उन्होंने माता को बासी चावल चढ़ाए और खाए। लेकिन उन्होंने शीतला सातम के दिन सुबह ही ताजा भोजन बना लिया। क्योंकि उनकी दोनों को हाल में ही संताने हुई थी। जिसकी वजह से उन्हें डर था कि उन्हें बासी भोजन से नुकसान पहुंच सकता है। जब सास को इस बारे में पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुई। कुछ देर के बाद ही उनकी दोनो संतानों की मृत्यु हो गई।

जब सास को यह पता चला तो उसने दोनो बहुओं को घर से निकला दिया उस बुढ़िया की दोनो बहुएं बच्चों के साथ घर से निकला दिया। दोनो बहुएं चलते- चलते बहुत थक गई जिसके बाद वह आराम करने के लिए रूक गईं। वहां उन दोनों बहनों को ओरी और शीतला मिली। वह दोनों अपने सिर की जुओं से बहुत परेशान थी। बुढिया की बहुओं को दोनों बहनों को इस दशा में देखकर बहुत दया आ गई और दोनों बहुएं उनका सिर साफ करने लगी।

कुछ देर के बाद जब दोनों बहनों को आराम मिल गया तो उन्होंने उन बहुओं को आर्शीवाद दिया की जल्द ही तुम्हारी कोख हरी हो जाए। यह देखकर दोनो बहने रोने लगी। जिसके बाद दोनों बहुओं ने अपने बच्चों के शव उन दोनों बहनों को दिखाए। ये सब देखकर शीतला ने उनसे कहा कि तुमने शीतला सातम के दिन ताजा भोजन बनाया था। जिसकी वजह से तुम्हारे साथ ऐसा हुआ। यह सब जानकर उन्होंने शीतला माता से क्षमा याचना की। इसके बाद माता ने दोनों बच्चों के मृत शरीर में प्राण डाल दिए। जिसके बाद शीतला सातम का व्रत पूरे धूमधाम से मनाया जाने लगा।

Next Story
Top