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Vivah Muhurat 2021 : 15 नवंबर से फिर सुनाई देगी शहनाईयों की गूंज, जानें शादियों की तारीखें, विवाह में लग्न का महत्व और क्यों मिलायी जाती है कुण्डली

Vivah Muhurat 2021 : इस साल 19 नवंबर से 13 दिसंबर तक केवल 15 मुहूर्त है। इस अबूझ मुहूर्त में भी बड़ी संख्या में लग्न होते है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह के आयोजन ज्यादा होते है। ऐसे में देवउठनी एकादशी से शादियां प्रारंभ हो जाएगी। नवंबर-दिसंबर में 15 दिन के शादियों के मुहूर्त में कई जोड़े शादी के बंधन में बंधेंगे।

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Vivah Muhurat 2021 : इस साल 19 नवंबर से 13 दिसंबर तक केवल 15 मुहूर्त है। इस अबूझ मुहूर्त में भी बड़ी संख्या में लग्न होते है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह के आयोजन ज्यादा होते है। ऐसे में देवउठनी एकादशी से शादियां प्रारंभ हो जाएगी। नवंबर-दिसंबर में 15 दिन के शादियों के मुहूर्त में कई जोड़े शादी के बंधन में बंधेंगे। 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी से 13 दिसंबर तक विवाह के लिए कुल 15 मुहूर्त होंगे। 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी से शुभकार्य प्रारंभ हो जाते है। कम मुहूर्त होने के कारण अधिकांश स्थानों पर मैरिज गार्डन, होटल में लोगों को मनचाही तारीख की बुकिंग नहीं मिल रही है। पंडितों के पास भी मुहूर्त की सभी तारीखें बुक हो चुकी है। इस बार शादियों पर कोरोना का अंकुश नहीं लगेगा।

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नवंबर-दिसंबर में 15 दिन शादी

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास के अनुसार जुलाई में देवशयन होने के बाद 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर विवाह मुहूर्त के साथ शादियों का दौर फिर शुरू होगा। नवंबर में 7 और दिसंबर में 15 तारीख के पहले तक विवाह के सिर्फ 8 मुहूर्त ही होंगे।

नवंबर-19, 20, 21, 26, 28, 29 व 30

दिसंबर-1, 2, 5, 6, 7, 11, 12 व 13

चार महीने में दो अधिकमास

15 नवंबर को चातुर्मास का समापन होगा। इसके साथ शुभ कार्य शुरू होगें। 16 दिसंबर 2021 से 13 जनवरी 2022 तक धनु संक्रांति का मलमास रहेगा।

यह हैं 2022 शादी के श्रेष्ठ मुहूर्त

जनवरी – 15, 20, 21, 22, 23, 25, 26, 27, 28, 29

फरवरी – 05, 06, 09, 10, 11, 16, 17, 19 और 20 इसके बाद 04 और 09 मार्च को भी शुभ विवाह का योग है। वहीं, 14, 17, 21 और 22 अप्रैल को भी शादी की तिथि है। इसके अलावा, 11, 12, 18, 20 और 25 मई को भी शुभ विवाह का मुहूर्त है। 16, 10,12 15, 16 और जून के अलावा, 3, 6, 8, 10, 11 और 14 जुलाई को भी शुभ विवाह किया जा सकता है। इसके बाद फिर नवंबर, 2022 में ही विवाह का मुहूर्त निकलेगा।

फिर लौटेगी खुशियों की रौनक

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि दुनिया भर में जब से कोरोना आया है, हर व्यक्ति को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में उन व्यापारियों को तो खासा नुकसान हुआ है जो कि सीजनल व्यापार करते हैं। लेकिन इस बार शादियों के सीजन से मैरिज गार्डन, होटल से लेकर बैंड, ढोल, कैटर्स, हलवाई आदि को काफी उम्मीदें हैं। हालांकि नवंबर-दिसंबर महीने में सीमित मुहूर्त हैं। ऐसे में होटल, हलवाई आदि लोगों को भारी बुकिंग मिल रही हैं। लेकिन जिनके घर में शादियां हैं। उन्हें मैरिज हॉल की बुकिंग न होने की वजह से अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही हालात बैंड-बाजों, ढोल, घोड़ी-बग्गी वालों की भी है। उम्मीद है कि इस बार कोरोना के कम होने से लोगों खुले मन से इस सीजन का आनंद ले सकेंगे।

होटल्स गार्डंस तेजी से बुक हो रहे 4 महीनों के सभी मुहूर्त में बुकिंग

भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि पिछले दो साल में केटर्स का कारोबार बुरी तरह पिटा है। शादियां बुक होकर फिर कैंसिल हो गई थीं। ग्राहकों को जमा राशि लौटाना पड़ा। अब नवंबर से फरवरी तक शादी की बुकिंग का दौर शुरू हो गया है। कोरोना की तीसरी लहर का डर है लेकिन लोग तेजी से बुकिंग करा रहे हैं। नवंबर से शुरू हो रही शादियों के लिए मेहमानों को ठहरने लाज की बुकिंग अच्छी हो रही है। इससे पिछले दो साल की निराशा दूर होगी। नवंबर.दिसंबर के सीजन के लिए बुकिंग का दौर शुरू हो जाने से संचालकों में आशा बंधी है।

इलेक्ट्रॉनिक कपड़ा बर्तन व ज्वेलरी बाजार में आएगी तेजी

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शादी के नवंबर-दिसंबर के सीजन में हालाकि ज्यादा कारोबार नहीं होता लेकिन पूरे साल का करीब 30 फीसदी व्यापार इन महीनों में होता है। शादी की मुख्य सीजन अप्रैल.मई का होता है जब कुल कारोबार का 60 फीसदी काम-काज होता है। अभी पूछताछ का दौर शुरू हो गया है। सोने के दाम कम होने से भी ज्वेलरी बाजार दम पकड़ रहा है। शादी का सीजन इसमें इजाफा करेगा। शादियों में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान देने की परंपरा रही है। एलईडीए वाशिंग मशीन आदि का उठाव होता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में अभी यह ट्रेंड बना हुआ है।

सीजनल कारोबारी के चेहरे खिले

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शादी के आयोजन से कई तरह के रोजगार जुड़े हैं। सीधे तौर पर केटरिंग बैंड-बाजे घोड़ी बत्ती टेंट और किराना कपड़ा ज्वेलरी का कारोबार होता है। नवंबर से शुरू होने वाले शादी के सीजन को बैंड एव डीजे घोड़ी बत्ती टेंट जैसे कारोबार शादियों में ही चलते हैं। मुहूर्तों में इतनी कमाई हो जाती है कि बाकी के दिन में छोटा-मोटा आर्डर मिलने से काम चलता रहता है। कोरोना के कारण दो साल से खाली बैठे हैं। अब उम्मीद है कि अच्छा काम होगा।

विवाह मुहूर्त में लग्न का महत्व

शादी-ब्याह के संबंध में लग्न का अर्थ होता है फेरे का समय। लग्न का निर्धारण शादी की तारीख तय होने के बाद ही होता है। यदि विवाह लग्न के निर्धारण में गलती होती है तो विवाह के लिए यह एक गंभीर दोष माना जाता है। विवाह संस्कार में तिथि को शरीर, चंद्रमा को मन, योग व नक्षत्रों को शरीर का अंग और लग्न को आत्मा माना गया है यानी लग्न के बिना विवाह अधूरा होता है।

क्यों मिलाई जाती है कुंडली

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि रीति-रिवाज और पंचांग के अनुसार विवाह में वर और वधू के बीच दोनों की कुंडलियों को मिलाया जाता है। इस व्यवस्था को कुंडली मिलान या गुण मिलान के नाम से जानते हैं। इसमें वर और कन्या की कुंडलियों को देखकर उनके 36 गुणों को मिलाया जाता है। जब दोनों के न्यूनतम 18 से 32 गुण मिल जाते हैं तो ही उनकी शादी के सफल होने की संभावना बनती है।बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके गुण मिलान में 24 से 32 गुण तक मिलते हैं लेकिन वैवाहिक जीवन बहुत ही दुश्वारियों भरा होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि पुरुष-स्त्री दोनों के जीवन का अलग-अलग विश्लेषण करने से पता चलता है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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