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श्रीराम मंदिर की नींव इन विशेष चीजों पर रखी जाएगी, आप भी जानें

भगवान राम की नगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बनने वाले श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव (बुनियाद) बाबा विश्वनाथ को अर्पित सोने से निर्मित शेषनाग पर रखी जाएगी। सोने से निर्मित शेषनाग के साथ ही नींव में चांदी के पांच बेलपत्र, सवा पाव चंदन और पंचरत्न भी यहां रखे जाएंगे। श्रीराम जन्मभूमि पर स्थापित होने वाले भगवान राम के इस भव्य मंदिर के निर्माण से पहले मंदिर की नींव रखने के शुभारंभ के अवसर पर काशी के प्रमुख विद्वानों की एक टीम अयोध्या आयी हुई है। विद्वानों ने मंदिर की नींव में रखने से पहले काशी के कोतवाल बाबा विश्वनाथ के सामने शेषनाग की मूर्ति समेत इन सभी चीजों को रखा और उनका पूजन आदि किया गया।

श्रीराम मंदिर की नींव इन विशेष चीजों पर रखी जाएगी, आप भी जानें
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प्रतीकात्मक

भगवान राम की नगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बनने वाले श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव (बुनियाद) बाबा विश्वनाथ को अर्पित सोने से निर्मित शेषनाग पर रखी जाएगी। सोने से निर्मित शेषनाग के साथ ही नींव में चांदी के पांच बेलपत्र, सवा पाव चंदन और पंचरत्न भी यहां रखे जाएंगे।

श्रीराम जन्मभूमि पर स्थापित होने वाले भगवान राम के इस भव्य मंदिर के निर्माण से पहले मंदिर की नींव रखने के शुभारंभ के अवसर पर काशी के प्रमुख विद्वानों की एक टीम अयोध्या आयी हुई है। विद्वानों ने मंदिर की नींव में रखने से पहले काशी के कोतवाल बाबा विश्वनाथ के सामने शेषनाग की मूर्ति समेत इन सभी चीजों को रखा और उनका पूजन आदि किया गया।

धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि शेषनाग पाताल लोक के स्वामी और भगवान शंकर के प्रतिनिधि माने जाते हैं। इसके साथ ही शेषनाग धरती को अपने सिर पर धारण करते हैं। वहीं शेषनाग की शैय्या पर भगवान विष्णु विराजमान रहते हैं इसलिए श्रीराम जन्मभूमि पर बनने वाले मंदिर की नींव में शेषनाग को विराजमान किया जाएगा।

वहीं कछुआ को माता लक्ष्मीजी का वाहन माना जाता है और समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने कछुए का अवतार लिया था और मंदराचल पर्वत जोकि उस दौरान समुद्र मथने के लिए मथानी के रुप में प्रयुक्त हुआ था उसको भगवान विष्णु ने अपनी पीठ पर उठाया था।

शेषनाग रसातल के स्वामी हैं। श्रीराम मंदिर की नींव में शेषनाग की उपस्थिति से मंदिर की दिव्यता और भव्यता अनंतकाल तक बनी रहेगी। पंचरत्नों को पंचभूतों का प्रतीक माना गया है।

वास्तु की दृष्टि से आधारपुरुष की विशेष मान्यता है। इसलिए मंदिर की नींव में शेषनाग के होने से किसी भी तरह के वास्तुदोष का प्रभाव नहीं रह जाएगा। वहीं बेलपत्र और चंदन भगवान शिव को बहुत पसंद हैं। भगवान शिव भगवान विष्णु और भगवान श्रीराम के अराध्य भी हैं।

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