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Teja Dashmi 2021 : तेजा दशमी कब है, क्यों मनाई जाती है, जानें इसकी लोक कथा

Teja Dashmi 2021 : तेजा दशमी कब है और कैसे मनायी जाती है। तथा इसके पीछे वो कौनसी लोक कथा है जिससे ये काफी लोकप्रिय है। तो आइए जानते हैं तेजा दशमी के बारे में...

Teja Dashmi 2021 : तेजा दशमी कब है, क्यों मनाई जाती है, जानें इसकी लोक कथा
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Teja Dashmi 2021: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन तेजा दशमी का पावन पुनीत पर्व मनाया जाता है। इस साल 16 सितंबर, दिन ग़ुरुवार को तेजा दशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन वीर तेजाजी के पूजन की परंपरा होती है और तेजाजी महाराज के मंदिरों में मेले के साथ-साथ तेजा जी की पूजा की जाती है। तो आइए जानते हैं क्या है तेजा दशमी। क्यों मनायी जाती है यह तेजा दशमी और क्या है इसके पीछे की लोक कथा।

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वीर तेजाजी महाराज का जन्म नागौर जिले के खडनाल गांव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घरमाघ शुक्ल चतुर्दशी संवत् 1130 यथा 29 जनवरी 1074 को जाट परिवार में हुआ था. बताया जाता है कि तेजाजी के माता-पिता को संतान नहीं हो रही थी तब उन्होंने शिव पार्वती की कठोर तपस्या की, जिसके बाद उनके घर तेजाजी का जन्म हुआ था। ऐसा बताया जाता है कि, तेजाजी के माता-पिता को संतान नहीं हो रही थी, तब उन्होंने तब उन्होंने शिव-पार्वती की कठोर तपस्या की, जिसके बाद उनके घर तेजाजी का जन्म हुआ। तेजाजी की यह कथा सुनने से हमारे घर में गरीबी और संकट का वास कभी नहीं होता है। अगर पूरी भक्ति भाव से इसकी कथा सुनी या पढ़ी जाए। ऐसी मान्यता है कि, जब वे दुनिया में आए तब एक भविष्यवाणी में कहा गया था कि भगवान ने खुद आपके घर अवतार लिया है।

एक बड़ी ही प्रचलित लोक कथा के मुताबिक, तेजाजी बचपन से ही शरारती थे। एक बार वे अपनी पत्नी को लेने अपनी ससुराल पहुंचते हैं, वह दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का दिन था। ससुराल पहुंचकर तेजाजी को मालूम चला कि, एक दस्यु उनकी ससुराल से सारे गोधन यानी सारी गायों को लूटकर ले गया है। यह खबर मिलते ही तेजाजी अपने एक साथी के साथ जंगल में उस डाकू से गायों को छुड़ाने के लिए निकल पड़ते हैं। रास्ते में एक सांप उनके घोड़े के सामने आ जाता है और तेजाजी को डसने की कोशिश करता है।

तेजाजी उस सांप को वचन दे देते हैं कि, वे गायों को छुड़ाकर वापस वहीं आएंगे, तब सांप उन्हें डस लें, यह सुनकर सांप उनका रास्ता छोड़ देता है।

तेजाजी डाकू से अपनी गायों को छुड़वाने में सफल रहते हैं। डाकुओं से लड़ाई में युद्ध के कारण वे घायल होकर रक्त से सराबोर हो जाते हैं और ऐसी ही अवस्था में सांप के पास जाते हैं।

तेजाजी को घायल हालत में देखकर नाग कहता है कि, तुम्हारा तो पूरा ही तन खून से पवित्र हो गया है, मैं डंक कहां मारु, तब तेजाजी उसे अपनी जीभ पर डसने के लिए कहते हैं।

मान्यता है कि, उनकी इस वचनवद्धता को देखकर नागदेव उन्हें आशीर्वाद देते हैं कि, जो व्यक्ति सर्पदंश से पीड़ित है वह अगर तुम्हारे नाम का धागा बांधेगा तो उस पर सांप के जहर का असर नहीं होगा।

इसी मान्यता के अनुसार, हर साल भाद्रपद शुक्ल दशमी के दिन तेजाजी की पूजा होती है।

दशमी तिथि पर तेजाजी के मंदिरों में लोगों की भारी भीड़ रहती है और तब से सर्पदंश से बचने के लिए तेजाजी के नाम का धागा बांधा जाता है और वह धागा बाद में उपचार के बाद खोला जाता है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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