Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Shardiya Navratri 2020 Mein Kab Hai : जानिए अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा का महत्व

Shardiya Navratri 2020 Mein Kab Hai : शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) के आठवें दिन यानी अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा (Goddess Durga) का आठवां स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों में मां महागौरी की पूजा बहुत अधिक महत्व बताया गया है तो चलिए जानते हैं मां महागौरी की पूजा का महत्व।

Shardiya Navratri 2020 Mein Kab Hai : जानिए अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा का महत्व
X
Shardiya Navratri 2020 Mein Kab Hai : जानिए अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा का महत्व

Shardiya Navratri 2020 Mein Kab Hai : शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 (Shardiya Navratri 17 October 2020) से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के आठवें स्वरूप को देवी महागौरी (Goddess Mahagauri) के नाम से जाना जाता है।इसी कारण से अष्टमी तिथि पर इनके पूजन को अत्याधिक महत्व दिया जाता है तो आइए जानते हैं क्या है मां महागौरी के पूजन का महत्व।

मां महागौरी की पूजा का महत्व (Maa Mahagauri Ki Puja Ka Mahatva)

देवी महागौरी को मां दुर्गा नवां रूप माना जाता है और नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की ही पूजा की जाती है। मां का रंग गौण यानी गोरा है और इन्हें शंख, चंद्र और कुंद के फूल की उपमा दी गई है।इन्हें अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। मां महागौरी के वस्त्र और सभी आभूषण श्वेत रंग के हैं। इसी कारण से मां महागौरी को श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है।

देवी महागौरी सिंह की सवारी के साथ बैल की भी सवारी करती हैं। इसी कारण से इन्हें वृषारूढ़ा कहकर भी संबोधित किया जाता है। माता की चार भुजाएं हैं। जिसमें से इन्होंने इनकी दाहिनी भुजा अभय मुद्रा में है तथा इन्होंने अपने नीचे वाले हाथ में त्रिशुल धारण किया है। माता के ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है।मां महागौरी पूरी तरह से शांत मुद्रा में रहती हैं।

मां महागौरी अलौकिक सिद्धियों की देवी मानी जाती है। इसलिए मां महागौरी की पूजा करने से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मां अपने भक्तों पर सदैव अपनी कृपा बरसाती हैं। इनकी पूजा से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। मां की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। इसी कारण से अष्टमी के दिन ध्यान, स्मरण, पूजन-आराधना भक्तों के लिए सदैव शुभ रहती हैं।

मां महागौरी की पूजा से मनुष्य असत्य के मार्ग के छोड़कर सत्य के मार्ग पर चलता है। अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा में नौ वर्ष से छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है और उनका आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। ऐसा करने से मां महागौरी बहुत प्रसन्न होती हैं और सदैव भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं। इतना ही नहीं मां महागौरी अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करके सदैव उन पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।

Next Story