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Shardiya Navratri 2020 Kab Se Hai: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन इस विधि से करें मां कात्यायनी की पूजा

Shardiya Navratri 2020 Kab Se Hai: शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा (Goddess Katyayani Puja) की जाती है। इस दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से मनचाहे जीवनसाथी का वरदान प्राप्त होता है तो चलिए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि।

Shardiya Navratri 2020 Kab Se Hai: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन इस विधि से करें मां कात्यायनी की पूजा
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Shardiya Navratri 2020 Kab Se Hai: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन इस विधि से करें मां कात्यायनी की पूजा

Shardiya Navratri 2020 Kab Se Hai: शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 (Shardiya Navratri 17 October 2020) से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि (Navratri) के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। इस दिन यदि आप मां कात्यायनी की पूजा पूरे विधि विधान से कर लेते हैं तो आपको वैवाहिक जीवन में आ रही सभी प्रकार की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी और आपका वैवाहिक जीवन हमेशा सुखमय बना रहेगा तो चलिए जानते हैं मां कात्यायनी की संपूर्ण पूजा विधि।

मां कात्यायनी की पूजा विधि (Goddess Katyayani Puja Vidhi)

1.मां कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। इसलिए साधक को इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।

2. इसके बाद एक साफ चौकी लेकर उस पर गंगाजल छिड़कें और मां कात्यायनी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और चौकी पर कलश की स्थापना करें।

3. मां कात्यायनी की मूर्ति स्थापित करने के बाद उन्हें रोली का तिलक करें और उन्हें लाल फूलों की माला पहनाएं और पुष्प अर्पित करें।

4. इसके बाद मां को लाल वस्त्र,3 हल्दी की गांठ,पीले फूल, फल, नैवेध आदि चढाएं।

5. यह सभी चीजें चढ़ाने के बाद हाथ में फूल लेकर या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ मंत्र का जाप करते हुए फूल को मां के चरणों में चढ़ा देना चाहिए।

6.इसके बाद मां कात्यायनी के आगे धूप व दीपक जलाकर उनकी विधिवत पूजा करें।

7.पूजा में मां कात्यायनी की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।

8.इसके बाद मां कात्यायनी की कपूर से आरती उतारें

9. मां कात्यायनी को शहद अत्याधिक प्रिय है इसलिए आप मां कात्यायनी को शहद का भोग अवश्य लगाएं।

10.अंत में मां कात्यायनी से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना अवश्य करें और शहद के प्रसाद का परिवार के लोगों में वितरण करें और स्वंय भी ग्रहण करें।

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