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गिलहरी से जुड़े शकुन-अशकुन, आप भी जानें

हमारे जीवन में हर पल कुछ ना कुछ ऐसा घटित होता रहता है। जिसे ज्योतिष के अनुसार एक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र और शकुन शास्त्र में कुछ पशु-पक्षियों का आपके जीवन में और आपके घर में आना शुभ माना जाता है। और वहीं दूसरी ओर कुछ पशु-पक्षियों का आपके जीवन और आपके घर में आना अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसे ही गिलहरी बहुत ही चंचल जीव मानी जाती है। और गिलहरी अधिकतर घर में घूमती रहती है। खुले घरों में तो गिलहरी आपको घूमती हुई बहुत ही देखने को मिल जाती है। तो आइए आप भी जानें गिलहरी से जुड़े शुभ और अशुभ शकुन के बारे में जरुरी बातें।

गिलहरी से जुड़े शकुन-अशकुन, आप भी जानें
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हमारे जीवन में हर पल कुछ ना कुछ ऐसा घटित होता रहता है। जिसे ज्योतिष के अनुसार एक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र और शकुन शास्त्र में कुछ पशु-पक्षियों का आपके जीवन में और आपके घर में आना शुभ माना जाता है। और वहीं दूसरी ओर कुछ पशु-पक्षियों का आपके जीवन और आपके घर में आना अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसे ही गिलहरी बहुत ही चंचल जीव मानी जाती है। और गिलहरी अधिकतर घर में घूमती रहती है। खुले घरों में तो गिलहरी आपको घूमती हुई बहुत ही देखने को मिल जाती है। तो आइए आप भी जानें गिलहरी से जुड़े शुभ और अशुभ शकुन के बारे में जरुरी बातें।

गिलहरी का आपके घर में आना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि गिलहरी जब आपके घर में इधर-उधर फूदकती है। तो इसका मतलब सौभाग्य से होता है। अगर आपके घर में अभी तक बच्चे की किलकारियां नहीं गुंजी हैं तो गिलहरी आपके आंगन में आई है। तो आपको ये जल्दी ही खुशखबरी का संकेत देती है। और अगर वहीं आपके घर में गिलहरी या चिड़ियां अपना घोंसला बना लें तो उस घर में सुख, शांति के साथ ही धन की कोई कमी नहीं होती है।

घर में चिड़िया का घोंसला बनाना भी शुभ शकुन माना जाता है। जिन घरों में चिड़ियाओं का घोंसला होता है वहां सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। इसी प्रकार यह भी कहा जाता है कि गिलहरी अगर किसी के पैरों को छूकर भाग जाए और फिर दोबारा दिखाई ना दें तो यह बुरा संकेत माना जाता है। इसका सीधा मतलब होता है कि आपके जीवन में कोई कठिन समय आने वाला है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार जब त्रेता युग में भगवान राम का अवतार हुआ था। और उनकी धर्मपत्नी माता सीता का अपहरण लंकापति रावण ने कर लिया था। तो भगवान राम वानरों की मदद से लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र पर सेतु का निर्माण करवा रहे थे। और उस समय सारे वानर सेतु के निर्माण कार्य में लगे हुए थे। और भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ समुद्र के किनारे बैठकर यह सारा वाकया देख रहे थे। इसी दौरान भगवान श्रीराम ने देखा कि एक गिलहरी बार-बार रेत में लेटकर रेत के कण अपने शरीर पर चिपटा लेती है, और फिर सेतु पर जाकर अपने शरीर से सारे रेत के कण झाड़ देती है। इस प्रकार उसे ऐसा करते देखकर भगवान राम ने लक्ष्मण से पूछा कि ये गिलहरी क्या कर रही है। तो इस पर लक्ष्मण ने भगवान राम से कहा कि ये गिलहरी खेल का आनंद ले रही है। इस पर श्रीराम मुस्कुराये और उस गिलहरी को अपने पास बुलाकर पूछा कि तुम इस प्रकार क्या कर रही हो। इस सवाल को सुनकर गिलहरी ने भगवान राम से कहा कि इस सेतु को बनाने में मैं भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार योगदान दे रही हूं। हालांकि मुझे पता है कि मुझ जैसे छोटे प्राणी की कही गिनती भी नहीं है। परन्तु इस अधर्म और धर्म की लड़ाई में मैं भी अपना योगदान देना चाहती हूं। गिलहरी की इन बातों से प्रभावित होकर भगवान श्रीराम ने प्रेम पूर्वक उस गिलहरी की पीठ पर हाथ फेरा। जिसके परिणाम स्वरूप गिलहरी की पीठ पर भगवान श्रीराम की अंगुलियों के निशान बन गए। और आज भी गिलहरी की पीठ पर काली-सफेद धारियां बनी होती हैं।

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