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Santan Saptami vrat 2021: संतान सप्तमी व्रत डेट, पूजा विधि और जानें संतान की मंगल कामना का उपाय

Santan Saptami vrat 2021: संतान सप्तमी व्रत साल 2021 में कब है। संतान सप्तमी व्रत की पूजा विधि क्या होगी। तथा संतान सप्तमी के दिन कौनसा उपाय करना चाहिए, जिससे हमारी मनोकामना पूरी हो जाए।

Santan Saptami vrat 2021: संतान सप्तमी व्रत डेट, पूजा विधि और जानें संतान की मंगल कामना का उपाय
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Santan Saptami vrat 2021: संतान सप्तमी व्रत डेट, पूजा विधि और जानें संतान की मंगल कामना का उपाय

Santan Saptami vrat 2021: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान संप्तमी का व्रत किया जाता है। इस साल 13 सितंबर 2021, दिन सोमवार को संतान सप्तमी का व्रत मनाया जाएगा। इस दिन माता-पिता या दोनों में से कोई एक भी संतान सप्तमी का व्रत एवं पूजा कर सकता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। यह व्रत संतान की प्राप्ति और उसकी कुशलता और उनकी उन्नति के लिए किया जाता है। तो आइए जानते हैं संतान सप्तमी व्रत के बारे में...

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संतान सप्तमी व्रत की विधि

संतान सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ कपड़ा पहनें और भगवान शिव व मां गौरी के समक्ष प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें। उसके बाद 'ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।' इस मंत्र का कम से कम मानसिक या माला लेकर 108 बार जाप करें। उसके बाद व्रत की शुरुआत करें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए शुद्धता के साथ पूजन का प्रसाद तैयार करें।

संतान सप्तमी के उपाय के लिए आप खीर, पुड़ी व गुड़ के सात पुआ अथवा सात मीठी पुड़ी तैयार करनी है। यह पूजा दोपहर तक आपको कर लेनी है।

पूजा के लिए धरती पर चौक बना लें अथवा धरती पर चौकी रख लें और उस पर माता पार्वती और शंकर भगवान की मूर्ति स्थापित करें और इसके बाद कलश की स्थापना करें। तथा आम के पत्तों के साथ में नारियल रखें। इसके बाद आप दीपक जलायें और आरती की थाली तैयार करें। हल्दी, कुमकुम, चावल, कपूर, फूल, कलावा आदि अन्य सामग्री एक साथ रख लें।

अब सात मीठी पुड़ी को केले के पत्ते में बांधकर पूजा में रखें और संतान की रक्षा और उन्नति के लिए भगवान शिव और गौरी मैया से प्रार्थना करें।

पूजन करते हुए भगवान शिव को कलावा अर्पित करें। पूजा करते समय सूत का डोरा या चांदी की चूड़ी हाथ में पहनकर रखनी चाहिए। यह व्रत माता-पिता द्वारा संतान की कामना और उज्जवल भविष्य के लिए किया जाता है।

पूजन के बाद धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर संतान सप्तमी की कथा पढ़ें अथवा सुनें। तथा बाद में कथा की पुस्तक का पूजन करें।

व्रत खोलने के लिए पूजन में चढ़ाई गई सात मीठी पुड़ी अथवा पुआ खाएं और अपना व्रत खोलें।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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