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पाकिस्तान के इस मंदिर से शुरू हुआ था होली का त्योहार, ये है पूरी कहानी!

पाकिस्तान में आने वाले पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर से शुरू हुई होली का त्योहार मनाने की प्रथा। भगवान विष्णु ने यही किया था हिरण्यकश्यप का वध

पाकिस्तान के इस मंदिर से शुरू हुआ था होली का त्योहार, ये है पूरी कहानी!

होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है। इस पर बात करें तो इसकी वजह भगवान विष्णु के भक्त प्रह्रलाद का नाम सामने आता है। जिन्हें मारने के लिए प्रह्रलाद की बुआ होलिका (Holika) उन्हें जल्ती आग में लेकर बैठ गई थी। इसमें होलिका का दहन (Holika Dahan) हो गया और विष्णु के भक्त प्रह्लाद सकुशल बचकर आ गये। इसी खुशी में लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का नारा लगाते हुए उत्सव मनाया। जो होली के रूप में मनाया जाने लगा, लेकिन क्या आप जानते है कि इसकी शुरूआत पाकिस्तान से हुई।

जानकारों की माने तो मान्यता है कि पाकिस्तान में स्थित पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर में से होली का त्योहार मनाना शुरू हुआ था। इसकी वजह यहीं पर भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद का जन्म स्थान और मंदिर होना था। इस मंदिर का नाम प्रह्लादपुरी मंदिर है। यही पर सबसे पहले होली का त्योहार मनाया गया। यहां होली के त्योहार पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। इतना ही नहीं होलिका दहन उत्सव दो दिन तक मनाया जाता है।

9 दिनों तक मनाई जाती है होली

कहा जाता है कि पाकिस्तान में मौजूद इस पंजाब प्रांत में होली, होलिका दहन के बाद 9 दिनों तक मनाई जाती है। होली के दिन यहां मटकी फोडने का भी चलन है। पश्चिमी पंजाब और पूर्वी पंजाब में यहां मटकी फोड़ी जाती है। यहां होली के त्योहार को चौक-पूर्णा नाम से जाना जाता है।

यही पर भगवान नरसिंह ने हिराण्यकश्यप को मारा था

जानकारों के अनुसार इस मंदिर के यहीं पर नरसिंह भगवान ने एक खंभे से निकलकर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप को मारा था। इसके बाद प्रह्लाद ने खुद ही इस मंदिर को बनवाया था। यह भी माना जाता है कि होलिका दहन की प्रथा यहीं से शुरू हुई थी।

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