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Ramayana : जानिए, आभूषण क्यों पहनती हैं स्त्रियां

  • 16 श्रृंगार आर्यव्रत की संस्कृति का अभिन्न अंग है।
  • जानिए मेहंदी का अर्थ
  • बिंदिया लगाने का अर्थ

Ramayana : जानिए, आभूषण क्यों पहनती हैं स्त्रियां
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Ramayana : रामायण के अनुसार भगवान राम ने जब सीता स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष तोड़ा था। उसके बाद सीता जी को विवाह की रस्म निभाने के लिए सजाया जा रहा था। तो उस दौरान जानकी जी ने अपनी माता से पूछा की माताश्री मेरा इतना श्रृंगार क्यों किया जा रहा है। तब जानकी जी की माताजी ने बताया कि बेटी विवाह के समय वधू का सोलह श्रृंगार करना आवश्यक है क्योंकि यह श्रृंगार वर-वधू के लिए नहीं किया जाता यह तो आर्यव्रत की संस्कृति का अभिन्न अंग है। और जानकी जी की माता ने 16 श्रृंगार का अर्थ बताया। तो आइए आप भी जानिए रामायण के अनुसार 16 श्रृंगार का अर्थ।

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श्रृंगार का अर्थ

  1. मिस्सी धारण करने का अर्थ : सीता जी की माता ने बताया कि बेटी मिस्सी धारण करने का अर्थ है, कि आज से तुम्हें बहाना बनाना छोड़ना होगा।
  2. मेहंदी का अर्थ : मेहंदी लगाने का अर्थ है, कि संसार में तुम्हें अपनी लाली बनाए रखनी होगी।
  3. काजल का क्या अर्थ : काजल लगाने का मतलब बताते हुए मिथिला की महारानी ने सीजा जी को बताया कि बेटी तुम्हें अब अपनी आंखों में सील का काजल हमेशा धारण करना होगा।
  4. बिंदिया लगाने का अर्थ : बिंदिया का अर्थ है कि आज से तुम्हें शरारत को छोड़ना होगा और सूर्य की तरह प्रकाशमान रहना होगा।
  5. नथ का अर्थ: नथ का अर्थ है मन की नथ यानी कि तुम आज के बाद किसी की बुराई नहीं करोगी। तुम्हें अपने मन पर काबू करना होगा।
  6. टीके का अर्थ : जानकी जी की माता ने टीके का अर्थ बताते हुए कहा कि पुत्री टीका यश का प्रतीक है। तुम्हें ऐसा कोई कार्य नहीं करना है, जिससे पिता या पति का घर कलंकित हो। क्योंकि अब तुम दो घरों की प्रतिष्ठा हो।
  7. बिन्दी का मतलब: उन्होंने जानकी जी को बताया कि बेटी बिन्दी का अर्थ है कि अपने पति और सास-ससुर आदि की सेवा करना।
  8. पत्ती का अर्थ : पत्ती का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि अपनी पंत यानी लाज को बनाए रखना है। लाज ही स्त्री का वास्तविक गहना होता है।
  9. करण फूल का अर्थ: माता ने कहा कि हे सीते करण फूल का अर्थ है, कि दूसरों की प्रशंसा सुनकर हमेशा प्रसन्न रहना।
  10. हंसली से तात्पर्य है कि हमेशा हंसमुख रहना होगा, सुख ही नहीं दुख में भी धैर्य से काम लेना पड़ेगा।
  11. मोहन माला का अर्थ : इसका अर्थ है कि सबका मन मोह लेने वाले कर्म करते रहना।
  12. नौलखा हार का अर्थ : सीता जी की माता ने बताया उन्हें बताया कि हे! पुत्री नौलखा हार का अर्थ है, कि पति से सदा हार स्वीकारना सीखना होगा।
  13. कड़े का अर्थ: कड़े का अर्थ है कि कठोर बोलने वाले शब्दों का त्याग करना।
  14. बांका का अर्थ: बांका का अर्थ है कि हमेशा सीधा-साधा जीवन व्यतीत करना।
  15. छल्ले का अर्थ: छल्ले का अर्थ है कि किसी से छल नहीं करना।
  16. पायल का अर्थ : पायल का अर्थ है कि सास व बूढ़ी औरतों के पैर दबाना उन्हें सम्मान देना, क्योंकि उनके चरणों में ही सच्चा स्वर्ग है।
  17. अंगूठी का अर्थ : अंगूठी का अर्थ है कि हमेशा छोटों को आशीर्वाद देते रहना।

इतना सब सुनने के बाद सीता जी ने कहा कि माता जी फिर मेरे अपने लिए क्या श्रृंगार है?

तब उनकी माता ने उन्हें समझाते हुए कहा कि बेटी आज के बाद तुम्हारा तो इस संसार में कोई अस्तित्व है ही नहीं। तुम तो अब से अपने पति की परछाई हो, हमेशा उनके सुख-दुख में साथ रहना और वही तेरा श्रृंगार हैं। और उनके आधे शरीर को तुम्हारी परछाई ही पूरा करेगी।

इसके बाद सीता जी हे राम! कहते हुए मुस्कुरा दी और शायद इसलिए शादी के बाद कोई भी स्त्री अपने पति का नाम भी कभी अपने मुख से नहीं लेती हैं। क्योंकि पति की अर्धांगिनी होने से कोई स्वयं अपना नाम लेगा, तो लोग क्या कहेंगे।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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