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राखी बांधने के लिए बहनों के पास 12 घंटे का वक्त, 29 साल बाद आयुष्मान और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ

कोरोना संकट के बीच मनने वाले रक्षाबंधन में इस वर्ष 29 साल बाद आयुष्मान और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ है। दो साल बाद रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा। इसके कारण राखी बांधने के लिए 12 घंटों का ही समय मिलेगा।

राखी बांधने के लिए बहनों के पास 12 घंटे का वक्त, 29 साल बाद आयुष्मान और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ
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रक्षाबन्धन (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना संकट के बीच मनने वाले रक्षाबंधन में इस वर्ष 29 साल बाद आयुष्मान और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ है। दो साल बाद रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा। इसके कारण राखी बांधने के लिए 12 घंटों का ही समय मिलेगा। भद्राकाल रविवार रात्रि 9 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ हो चुका है, जो साेमवार सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इसके बाद ही राखी बांधी जा सकेगी। आज सावन का अंतिम सोमवार भी है। इस कारण भी लोगों में इसे लेकर विशेष उत्साह है।

श्री सुरेश्वर महादेव पीठ के संस्थापक स्वामी राजेश्वरानंद के अनुसार, इस बार का रक्षाबंधन शुभ फलदायी रहेगा। 29 साल बाद बन रहे इस संयोग में सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आयुष्मान दीर्घायु योग से भाई-बहन दोनों की आयु लंबी होती है।

मकर राशि के स्वामी शनि और सूर्य आपस में समसप्तक योग बना रहे हैं। शनि और सूर्य दोनों आयु बढ़ाते हैं। इसलिए आज के दिन शुभ मुहूर्त में बांधी गई राखी भाई-बहन दोनों को विशेष फल प्रदान करेगी।

रात्रि 9.28 को समाप्त हो जाएगी पूर्णिमा तिथि

महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला ने बताया, भद्राकाल को छोड़कर पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है। राखी का त्योहार सुबह 9 बजकर 28 मिनट से शुरू हो जाएगा। सुबह 9.28 से 10.30 बजे तक शुभ, दोपहर 1.30 से 3 बजे तक चर की चौघड़िया, दोपहर 3 से 4.30 बजे तक लाभ की चौघड़िया, शाम 4.30 से 6 बजे तक अमृत की चौघड़िया, शाम 6 से 7.30 बजे चर की चौघड़िया का योग बन रहा है।

दोपहर को 1 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 35 मिनट तक बहुत ही अच्छा समय है। इसके बाद शाम को 7 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 9.28 के बीच में बहुत अच्छा मुहूर्त है। 3 अगस्त को रात्रि 9 बजकर 28 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। इससे पहले राखी बांध लें।

पिछले वर्ष मिला था पूरा दिन

2018 और 2019 में भद्रा का साया रक्षाबंधन पर नहीं था। राखी बांधने पूरे दिन का वक्त मिला था। इससे पहले 2017 में सुबह 11.4 तक भद्रा था। 2016 में भी भद्रा नहीं था, जबकि इससे पहले 2015 में भाइयों की कलाई भद्राकाल के कारण दोपहर 1 बजकर 50 मिनट और 2014 में 1 बजकर 37 मिनट तक सुनी रही थी। 2012 व 2013 में भी भद्रा नहीं थी।

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