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जानिए गायत्री मंत्र की अमोघ शक्ति

हम सभी ने गायत्री मंत्र के बारे में पढ़ा और सुना है। गायत्री मंत्र केवल हिंदू आस्था का स्वर नहीं है अपितु विज्ञान की दृष्टि से भी गायत्री मंत्र अपने आप में जादुई और चमत्कारी मंत्र है। गायत्री मंत्र की ग़ूढ शब्द संरचना ऐसे दिव्य स्वर ऊर्जा का संचार करती ही जो मनुष्य के फिजिकल और एस्ट्रल बॉडी दोनों पर पॉजेटिव असर करती है। मनुष्य के मस्तिष्क के बिलियनस और बिलियनस न्योरोन्स को गायत्री मंत्र प्रभावित करता है। गायत्री मंत्र उसी संजीवनी बूटी का नाम है जो अपने स्पर्श से सबका भला करने की अमोघ शक्ति रखती है।

जानिए गायत्री मंत्र की अमोघ शक्ति
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हम सभी ने गायत्री मंत्र के बारे में पढ़ा और सुना है। गायत्री मंत्र केवल हिंदू आस्था का स्वर नहीं है अपितु विज्ञान की दृष्टि से भी गायत्री मंत्र अपने आप में जादुई और चमत्कारी मंत्र है। गायत्री मंत्र की ग़ूढ शब्द संरचना ऐसे दिव्य स्वर ऊर्जा का संचार करती ही जो मनुष्य के फिजिकल और एस्ट्रल बॉडी दोनों पर पॉजेटिव असर करती है। मनुष्य के मस्तिष्क के बिलियनस और बिलियनस न्योरोन्स को गायत्री मंत्र प्रभावित करता है। गायत्री मंत्र उसी संजीवनी बूटी का नाम है जो अपने स्पर्श से सबका भला करने की अमोघ शक्ति रखती है।


जर्मन के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति गायत्री मंत्र का पाठ नहीं भी करे, व्यक्ति सिर्फ गायत्री मंत्र का पाठ श्रवण भी ले तो भी उसके शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है। मनुष्य के शरीर के साथ-साथ ये सारी सृष्टि ही वैदिक स्पंदनों से बनी हुई तभी तो हमारे वेदों में कहा गया है कि यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे अर्थात ब्रह्मांड की प्रत्येक चीज इस शरीर के भीतर है। गायत्री मंत्र ब्रह्मांड की मूल उर्जा का मंत्रमयी स्वरूप है।

अमेरिका के ओहियो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, कैंसर ग्रस्त फेफड़ों, आंत, मस्तिष्क, स्तन, त्वचा और फाइब्रो ब्लास्ट की लाइनिंग्स पर जब सामवेद के मंत्रों और हनुमान चालीसा के पाठ का प्रभाव परखा गया तो कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि में भारी गिरावट आई। इसके विपरीत तेज गति वाले पाश्चात्य और तेज ध्वनि वाले रॉक म्यूजिक से कैंसर की कोशिकाओं में तेजी के साथ बढ़ोत्तरी हुई।

कहा जाता है कि जब भी कोई व्यक्ति गायत्री मंत्र का पाठ करता है तो अनेक प्रकार की संवेदनाएं इस मंत्र से होती हुई व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं। जर्मन वैज्ञानिकों की मानें तो जब भी कोई व्यक्ति अपने मुंह से कुछ बोलता है तो उसके बोलने में आवाज का जो स्पंदन और कंपन होता है, वो 175 प्रकार का होता है। जब कोई कोयल स्वर में गाती है तो उसकी आवाज में 500 प्रकार का कंपन होता है। वहीं, दक्षिण भारत के विद्वानों से जब विधिपूर्वक गायत्री मंत्र का पाठ कराया गया, तो यंत्रों के माध्यम से यह पता चला कि गायत्री मंत्र का पाठ करने से संपूर्ण स्पंदन के जो अनुभव हुए, वे 700 प्रकार के थे।

मंत्र का पाठ सुनने से भी पड़ता है असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति पाठ नहीं भी करे, सिर्फ पाठ सुन भी ले तो भी उसके शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है। उन्होंने मनुष्य की आकृति का छोटा सा यंत्र बनाया और उस आकृति में जगह-जगह कुछ छोटी-छोटी लाइटें लगा दी गईं। लाइट लगाने के बाद यंत्र के आगे लिख दिया कि यहां पर खड़ा होकर कोई आदमी किसी भी तरह की आवाजें निकालें तो उस आवाज के हिसाब से लाइटें मनुष्य की आकृति में जलती नजर आएंगी, लेकिन अगर किसी ने जाकर गायत्री मंत्र बोल दिया तो पांव से लेकर सिर तक सारी की सारी लाइटें एक साथ जलने लग जाती हैं। दुनियाभर के मंत्र और किसी भी प्रकार की आवाजें निकालने से ये सारी की सारी लाइटें नहीं जलतीं। एक गायत्री मंत्र बोलने से सब जलने लग जाती हैं क्योंकि इसके अंदर जो वाइब्रेशन है, वह अद्भुत है।

किस रोग में मरीजों को मिला फायदा

गायत्री मंत्र का चिकित्सा के लगभग पचास रोगों के पांच हजार मरीजों पर किए गए क्लीनिकल परीक्षणों के अनुसार दमा, अस्थमा रोग में 70 फीसदी, स्त्री रोगों में 65 फीसदी, त्वचा एवं चिंता संबंधी रोगों में 60 फीसदी, उच्च रक्तदाब, हाइपरटेंशन से पीड़ितों में 55 फीसदी, ऑर्थराइटिस में 51 फीसदी, डिस्क संबंधी समस्याओं में 41 फीसदी, आंखों के रोगों में 41 फीसदी और एलर्जी की अलग-अलग समस्याओं में 40 फीसदी लाभ हुआ। निश्चित ही मंत्र चिकित्सा उन लोगों के लिए तो वरदान ही है जो पुराने और गंभीर रोगों से ग्रस्त हैं।

मंत्र चिकित्सा भारत की महान परंपरा का अभिन्न अंग रही है। आधुनिकता के प्रभाव में भले ही हम अपनी महान विद्याओं को शनै: शनै: विस्मृत कर रहे हैं लेकिन पश्चिम का विज्ञान भारत की प्राचीन और ग़ूढ तथ्यों को कसौटी पर कस कर अचंभित हो रहा है। मनोदैहिक रोगों से पीड़ित संसार के लिए मंत्र और ध्यान से बेहतर चिकित्सा और कुछ भी नहीं है। आधुनिक चिकित्सा केवल देह के रोग को ही पकड़ पाते हैं वो भी निर्जीव मशीनों की सहायता से किंतु प्राचीन चिकित्सा विधि में मनुष्य के मन की जांच के बाद शरीर पर उपजे रोग का इलाज किया जाता था अर्थात व्याधि की जड़ तक पहुंचा जाता था।

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