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Pitru Paksha Special : प्रेत श्राप के प्रभाव और उससे मुक्ति के उपाय, आप भी जानें

Pitru Paksha Special : अगर आप अपने पितृों आदि का श्राद्ध कर्म ठीक से नहीं करता हो या आप अपने घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं करते हैं तो आपके जीवन में या आपके परिवार में प्रेत बाधाएं आती हैं। आपके पितृ आपसे अप्रसन्न हो जाते हैं। और इस दोष के कारण आपके वंश वृद्धि में बाधा भी आ सकती हैं। तो आइए आप भी जानें शास्त्रों के अनुसार प्रेत श्राप और प्रेत शांति के उपाय।

Pitru Paksha Special :  प्रेत श्राप के प्रभाव और उससे मुक्ति के उपाय, आप भी जानें
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प्रतीकात्मक

Pitru Paksha Special : अगर आप अपने पितृों आदि का श्राद्ध कर्म ठीक से नहीं करता हो या आप अपने घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं करते हैं तो आपके जीवन में या आपके परिवार में प्रेत बाधाएं आती हैं। आपके पितृ आपसे अप्रसन्न हो जाते हैं। और इस दोष के कारण आपके वंश वृद्धि में बाधा भी आ सकती हैं। तो आइए आप भी जानें शास्त्रों के अनुसार प्रेत श्राप और प्रेत शांति के उपाय।

क्या होता है प्रेत श्राप

यदि किसी जातक की कुंडली के पंचम भाव में शनि तथा सूर्य हों और सप्तम भाव में चंद्रमा कमजोर स्थित में हो तथा लग्न में राहु, बारहवें भाव में गुरु हो तो वह जातक प्रेत श्राप के कारण अनेक प्रकार से पीड़ित रहता है। इस कारण उस जातक के घर में वंश बढ़ने में समस्या भी जा जाती है।

उपाय

जातक को पितरों के श्राप से मुक्ति के लिए भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। तथा भगवान शिव की पूजा संपन्न हो जाने के बाद विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक कराना चाहिए। ब्राह्मणों को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, गोदान और दक्षिणा देनी चाहिए। इस उपाय को करने से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है। तीर्थ स्थानों पर स्नान और दान करने से व्यक्ति को अनेक लाभ और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

ऐसे अर्पण करें अपने पितरों के लिए भोजन

जिस दिन आपके पितरों का श्राद्ध हो उस दिन सुबह स्नान आदि कार्यों से निवृत होने के बाद अपने पितरों के निमित उनके पसंद का भोजन आदि तैयार करें। उसके बाद पितरों के निमित्त बनाए गए भोजन में थोड़ा सा भोजन लेकर उसके पांच अलग-अलग भाग कर लें। और प्रत्येक भाग में जौ और काले तिल मिलाएं। इसके बाद प्रथम भाग गाय को खिलाएं। दूसरा भाग कौए को खिलाने के लिए अपने घर की छत पर डाल दें। पितरों के निमित निकाले गए भोजन का तीसरा भाग बिल्ली को दें। और चौथा भाग कुत्ते को खिला दें। इसके बाद पांचवां हिस्सा किसी सुनसान जगह पर रख दें। और वहां भोजन रखने के बाद लौटते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें। घर वापस आने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं। और भोजन कराने के बाद ब्राह्मणों को वस्त्रादि और दक्षिणा देकर विदा करें।

अगर आप में ब्राह्मणों को भोजन करवाने की क्षमता नहीं है तो आप पितृपक्ष के 15 दिनों तक गाय को हरी-हरी घास खिलाएं और पानी पिलाएं। शास्त्रों में बताया गया है कि ऐसा करने से पितरों को मुक्ति मिल जाती है तथा पितरों के आशीर्वाद से श्राद्ध कर्म करने वाले की उन्नति होती है, उसके कष्ट दूर हो जाते हैं।

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