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Pitru Paksha 2021: जानें, पितृ पक्ष का ये खास महत्व और पूर्वजों के ऋण से मुक्ति के उपाय

Pitru Paksha 2021: मनुष्य जब जन्म लेता है तो उसी समय वह जीवन चक्र के साथ जुड़ जाता है। जैसे जन्म होता है, वैसी ही उसकी मृत्यु भी होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार, इंसान के जीवनकाल के दौरान कई सारी प्रथाओं और परंपराओं का पालन किया जाता है। वैसे भी किसी इंसान की मृत्यु के पश्चात हम कई सारी प्रथाओं और मान्यताओं का पालन करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हर मनुष्य के ऊपर तीन प्रकार के ऋण होते हैं। जिनमें देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण शामिल हैं। हमें तीन तीनों ऋणों को अपने जीवनकाल में चुकाना पड़ता है। पितृ ऋण को पितृ पक्ष में चुकाया जाता है।

Pitru Paksha 2021: दक्षिण दिशा की ओर मुखकर आंसू बहा दें तो हो जाएगा श्राद्ध
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Pitru Paksha 2021: मनुष्य जब जन्म लेता है तो उसी समय वह जीवन चक्र के साथ जुड़ जाता है। जैसे जन्म होता है, वैसी ही उसकी मृत्यु भी होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार, इंसान के जीवनकाल के दौरान कई सारी प्रथाओं और परंपराओं का पालन किया जाता है। वैसे भी किसी इंसान की मृत्यु के पश्चात हम कई सारी प्रथाओं और मान्यताओं का पालन करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हर मनुष्य के ऊपर तीन प्रकार के ऋण होते हैं। जिनमें देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण शामिल हैं। हमें तीन तीनों ऋणों को अपने जीवनकाल में चुकाना पड़ता है। पितृ ऋण को पितृ पक्ष में चुकाया जाता है।

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पितृ पक्ष की खास बातें

  • पितृ पक्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के अंत में आने वाली 16 चंद्र दिवसों की अवधि है।
  • इस समय पितृों की शांति की लिए हर साल हिन्दू अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हमारे पूर्वजों के प्राण पितृ लोक में वास करते हैं। जिनके मुखिया यमराज माने जाते हैं।
  • ऐसा मानते हैं कि, यमराज सभी पितृों को अपने परिजनों से पितृदान स्वीकार करने के लिए पितृ पक्ष में आजाद कर देते हैं।
  • हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत ही ज्यादा महत्व है। ऐसा मानते हैं कि, पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को पानी और भोजन का दान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

कथा

पितृ पक्ष से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार, महाभारत में युद्ध के दौरान जब महायोद्धा कर्ण का निधन हुआ, तब उनकी आत्मा स्वर्ग गई। वहां उन्हें खाने में सोना और अन्य जेवरात दिए गए, ऐसा देखकर उनकी कुछ समझ में नहीं आया।

जब उन्होंने इस बारे में पूछा तब उन्हें इंद्रदेव ने बताया कि, जब -जब तुमने दान करने का शुभ कार्य किया, तब-तब तुमने सोना और अन्य आभूषणों का ही दान किया था, कभी भी तुमने अपने पूर्वजों के लिए अन्न दान नहीं किया और इसीलिए तुम्हें खाने में सोना और अन्य जेवरातों से भरी थाली परोसी गई।

कर्ण अपने पूर्वजों से जुड़ी इस प्रथा से अनजान थे और इंद्र से मांफी मांगते हुए बोले कि, मुझे पृथ्वी लोक जाकर अपनी गलती सुधारने का एक मौका और दे दीजिए।

देवराज इंद्र ने उनकी इस गलती को स्वीकार कर लिया और उन्हें 15 दिनों के लिए फिर से पृथ्वी लोक पर भेज दिया। ताकि वे अपने पूर्वजों को श्राद्ध दान कर सकें। इन्हीं 15 दिनों के समय को पितृ पक्ष के नाम से जाना जाता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध के अलावा और भी अन्य कार्य किए जाते हैं।

ब्राह्मण भोज

इस दौरान ब्राह्मणों को अन्न दान दिया जाता है। उन्हें घर बुलाकर उनका आदर सत्कार किया जाता है और उनसे आशीर्वाद लेते हैं।

पिंडदान

इस दिन हम चावल और तिल के बीज लेकर उनका एक छोटा सा गोला बनाते हैं। इस गोले को छूकर हम अपने पूर्वजों का आह्वान करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

तर्पण

कहते हैं कि, जल का दान सबसे श्रेष्ठ दान है। आप इस दौरान देवों, ऋषियों और अपने पूर्वजों का जल दान कर सकते हैं और इस तरह दान देकर हम अपने पितृ ऋण को चुकाते हैं।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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