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Pandav panchami 2021: पांडव पंचमी पर जानें कैसे लिया पांडवों ने कुंती और माद्री के गर्भ से जन्म

Pandav panchami 2021: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पांडव पंचमी मनायी जाती है। पांडु के पुत्र होने के कारण महाभारत के पांचों योद्धाओं को पांडव कहा जाता है। तो आइए जानते हैं इनके जन्म के संबंध में एक रोचक कथा के बारे में...

Pandav panchami 2021: पांडव पंचमी पर जानें कैसे लिया पांडवों ने कुंती और माद्री के गर्भ से जन्म
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Pandav panchami 2021: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पांडव पंचमी मनायी जाती है। पांडु के पुत्र होने के कारण महाभारत के पांचों योद्धाओं को पांडव कहा जाता है। तो आइए जानते हैं इनके जन्म के संबंध में एक रोचक कथा के बारे में...

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पांडवों के जन्म की कथा

महाभारत के आदि पर्व के अनुसार एक दिन महाराज पांडु आखेट के लिए निकलते हैं। जंगल में बहुत दूर से देखने पर उनको एक हिरन दिखाई देता है। वे उसे एक तीर से मार देते हैं। वह हिरन एक ऋषि किंदम होते हैं और वो अपनी पत्नी के साथ मैथुन रत थे। ऋषि किंदम मरते वक्त महाराज पांडु को शाप देते हैं कि, तुम भी मेरी तरह ही मृत्यु को प्राप्त हो जाओंगे। अर्थात जब भी तुम मैथुनरत होगे तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।

इस शाप के भय से महाराज पांडु अपना राज्य अपने भाई धृतराष्ट्र को सौंपकर अपनी पत्नी कुंती और माद्री के साथ जंगल चले जाते हैं। तथा वहां वे संयासियों का जीवन जीने लगते हैं। परन्तु पांडु इस बात से दुखी रहते हैं कि, उनकी कोई संतान नहीं है और वे कुंती को समझाने का प्रयत्न करते हैं कि, उसे किसी ऋषि के साथ समागम करके संतान उत्पन्न करनी चाहिए।

पांडु के लाख बार समझाने के बाद कुंती मंत्र शक्ति के बल पर एक-एक कर तीन देवताओं का आह्वान करती है और उनके वरदान स्वरुप वह तीन पुत्रों को जन्म देती है।

धर्मराज से युधिष्ठिर, पवनदेव से भीम और देवराज इंद्र से अर्जुन को वह जन्म देती है। वहीं कुंती उसी मंत्र को माद्री को भी सिखा देती है।

माद्री भी इसी मंत्र शक्ति के बल पर अश्विनी कुमारों का आह्वान करती है और उनसे नकुल और सहदेव को जन्म देती है। इसका मतलब यह है कि, पांडु पुत्र असल में पांडु पुत्र नहीं थे।

इसके पहले इसी तरह कुंती अपनी कुंवारी अवस्था में सूर्यदेव का आह्वान कर कर्ण को भी जन्म देती है। इसी तरह कुंती के चार और माद्री के दो पुत्र मिलाकर कुल छह पुत्र होते हैं।

युधिष्ठिर धर्मात्मा और सत्यवादी थे। भीम अपनी शक्ति तथा भूख के लिए जाने जाते थे। वहीं अर्जुन महान धर्नुधर के रुप में विश्व विख्यात थे। नकुल निपुण घुड़सवार और अश्वों के विशेषज्ञ थे। जबकि सहदेव निपुण तलवार भाजक थे।

वहीं कर्ण के बारे में तो सभी जानते हैं कि, वे सूर्य पुत्र होने के साथ ही कवच कुंडल लेकर पैदा हुए थे और वे सबसे बड़े दानवीर थे। वहीं भविष्य पुराण के अनुसार, पांडवों ने कलयुग में भी जन्म लिया था।

वहीं पांडवों के इस तरह से जन्म लेने की कथा अपने आप में बहुत रोचक है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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