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नवरात्रि पूजन 2020: नवरात्रि पूजन की विधि, आप भी जानें

नवरात्रि पूजन 2020: शारदीय नवरात्रि पूजन की सभी आवश्यक सामग्री हमें नवरात्रि से पहले या प्रथम नवरात्रि के दिन सुबह-सुबह खरीदकर अपने घर लेकर आना चाहिए। और इसके बाद जो भी लोग घर में नवरात्रि का उपवास रखने के इच्छुक हों। उन्हें सुबह जल्दी ही नित्य क्रिया से निवृत हो जाने के बाद स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लेने चाहिए।

नवरात्रि पूजन 2020: नवरात्रि पूजन की विधि, आप भी जानें
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प्रतीकात्मक तस्वीर



नवरात्रि पूजन 2020: शारदीय नवरात्रि पूजन की सभी आवश्यक सामग्री हमें नवरात्रि से पहले या प्रथम नवरात्रि के दिन सुबह-सुबह खरीदकर अपने घर लेकर आना चाहिए। और इसके बाद जो भी लोग घर में नवरात्रि का उपवास रखने के इच्छुक हों। उन्हें सुबह जल्दी ही नित्य क्रिया से निवृत हो जाने के बाद स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लेने चाहिए।

इसके बाद नवरात्रि के पूजन कर सामग्री को लेकर जहां आप अपने घर में माता की चौकी लगाना चाहते हैं वहां बैठें। और उसके बाद सारी सामग्री पर गंगाजल का हल्का सा छिड़काव करें। तथा सबसे पहले माता की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। और उस चौकी पर माता नवदुर्गा की तस्वीर लगाएं। उसके बाद कलश में थोड़ा सा गंगाजल मिश्रित जल भरकर चौकी पर रखें। और कलश पर मौली बांधें।

इसके बाद कलश पर रोली से टीका लगाएं, स्वास्तिक बनाएं और कलश मातारानी के दाहिने हाथ की तरफ रखना होता है इसलिए माता के दाहिने हाथ की ओर थोड़े से चावल रखने के बाद उन चावलों पर कलश की स्थापना करें। और उसके बाद कलश में सुपारी, एक सिक्का डाल देना है। उसके बाद आम के पत्तों पर रोली से टीका लगाना है, और उसके बाद आम के पत्तों को कलश के मुख पर रखना है। और आम के पत्ते कलश पर रखने के बाद कलश के ऊपर एक प्लेट आदि रखना है। और उस प्लेट में भी थोड़े से चावल डालने चाहिए। और उसके बाद नारियल पर लाल कपड़ा लपेट कर और मौली से बांधने के बाद कलश पर रखी हुई प्लेट के ऊपर रखना चाहिए।

फिर आप मिट्टी का बर्तन लें, और मिट्टी के बर्तन पर रोली आदि का टीका लगाएं। और उस बर्तन में मिट्टी डालें, बर्तन को थोड़ा सा खाली रखना है। मिट्टी में कंकर आदि नहीं होने चाहिए। पूजा के इस बर्तन में सदैव पीली और उपजाऊ मिट्टी का ही प्रयोग करना चाहिए। तथा बारीक मिट्टी का ही प्रयोग करना चाहिए। और इसके बाद उस बर्तन में थोड़े से जौ के बीज डाल देने चाहिए। और मिट्टी में मिलाकर थोड़ा सा जल इस बर्तन में डाल देना चाहिए। और इस पात्र को चौकी के सामने ही दाहिने ओर बर्तन के नीचे थोड़े से चावल रखकर उस पर उस बर्तन को रख देना चाहिए।

अब आप पूजा की थाली लें, यानी माता रानी की आरती की थाली लें, और चौकी पर रखें। इसके बाद आरती की थाली में थोड़े से फूल, रखने के बाद अखंड ज्योति के लिए उपयोग में आने वाला दीया रखें और उस दीये में एक अच्छी सी मौली या रूई की बत्ती लगाएं, इसके बाद ज्योति में थोड़ा सा घी डालें। इसके बाद माता रानी को आप चुनरी पहनाएं। और मातारानी को फूल आदि अर्पित करें। क्योंकि माता रानी को गुलाब के फूल बहुत पसंद हैं, इसलिए हो सके तो माता रानी को गुलाब के ही फूल अर्पित करें। और उसके बाद मातारानी को फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद मातारानी को टीका लगाएं। और उसके बाद रोली का टीका स्वयं और परिवार में जो भी सदस्य नवरात्रि का उपवास और पूजन करना चाहते हैं सभी को टीका लगाएं। और उसके बाद कलश देवता को भी फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा की थाली में धूप-अगरबत्ती आदि लगाएं। माता रानी की धूप आदि करने के लिए आप एक पात्र में कपूर या अन्य किसी साधन से अग्नि प्रकट करने के बाद आप और परिवार के जो भी सदस्य मातारानी का पूजन करना चाहते हैं, उस पात्र में लौंग के जोड़े घी लगाकर चढ़ाएं। शास्त्रों में ऐसा कहा जाता है कि जो भी माता रानी का व्रत अथवा नवरात्रि का व्रत करता है उसे इस दौरान माता रानी की पूजा में एक लौंग का जोड़ा जरूर चढ़ाना चाहिए। और ध्यान रहे कि मातारानी को वहीं लौंग अर्पित करनी है जिस लौंग में फूल हो, बिना फूल वाली लौंग मातारानी को अर्पित नहीं करनी चाहिए।

इसके बाद मातारानी की चौकी के सामने मातारानी के चरण चिन्ह बनाएं, ये चरण चिन्ह आप बाजार से भी ला सकते हैं अथवा रोली, कुमकुम आदि से स्वयं भी बना सकते हैं। और इसके बाद मां के चरणों की विधिवत पूजा करनी चाहिए।

इसके बाद आप मातारानी के भोग के लिए ड्राईफ्रूट यानि पंचमेवा एक पात्र में लेकर माता के समक्ष रखें, और पांच प्रकार के फल मातारानी की पूजा में रखें। इसके बाद अखंड दीप, धूप, अगरबत्ती और लौंग चढ़ानें वाले पात्र में अग्नि प्रज्वलित करें। और माता रानी की विधिवत आरती करें।

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