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नवरात्रि के बाद ज्वारे का क्या करें, आप भी जानें

नवरात्रि के दौरान हम लोग मातारानी की पूजा करते हैं। कलश स्थापना करते हैं, नारियल आदि से माता का पूजन करते हैं। और इसके साथ ही हम लोग ज्वारे भी बोते हैं। इतना सब करने के बाद हमें यह ही नही पता होता है कि कलश के साथ रखे हुए जल का हम लोग क्या करें। और उस नारियल का क्या करें, और साथ ही जो हमने ज्वारे बोए थे उनका क्या करें। तो आइए आप भी जानें इस बारे में आवश्यक बातें।

नवरात्रि के बाद ज्वारे का क्या करें, आप भी जानें
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नवरात्रि के दौरान हम लोग मातारानी की पूजा करते हैं। कलश स्थापना करते हैं, नारियल आदि से माता का पूजन करते हैं। और इसके साथ ही हम लोग ज्वारे भी बोते हैं। इतना सब करने के बाद हमें यह ही नहीं पता होता है कि कलश के साथ रखे हुए जल का हम लोग क्या करें। और उस नारियल का क्या करें, और साथ ही जो हमने ज्वारे बोए थे उनका क्या करें। तो आइए आप भी जानें इस बारे में आवश्यक बातें।

नवरात्रि के बाद या तो हम कलश को उठाकर उसके पानी को किसी पेड़ में डाल देते हैं। और उसी तरह हम ज्वार के भी दो-तीन पत्ते तोड़कर किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख देते हैं अथवा किसी बहते हुए पानी में विसर्जित कर देते हैं। लेकिन आज कल तो हम लोग कुछ अन्य कारणों से इन्हें बहते हुए पानी में भी विसर्जित नहीं कर पाते हैं। क्योंकि आज कल नदियों में इस प्रकार की वस्तुओं को डालने पर सरकार की तरफ से रोक लगाई हुई है। और इसी कारण हम लोग कई बार कसमस में पड़ जाते हैं कि इन ज्वारों का क्या करें। और इस कलश के पानी का क्या करें। सबसे पहले हम अष्टमी अथवा नवमी के दिन पूजा करने के बाद जब हम कलश को अपनी जगह से हटाते हैं। तो सबसे पहले हम आम के पत्तों को कलश से अलग कर देते हैं। उसके बाद नारियल को तोड़कर उसकी गरी निकालकर हम लोग प्रसाद के रुप में सबको बांट देते हैं। जिन कन्याओं को हम लोग भोजन कराते हैं उनके भोजन के साथ भी हम उसे प्रसाद के रुप में परोस देते हैं। तथा इस कलश के जल को आम के पत्तों की मदद से अपने घर में छिड़क देते हैं। जिससे हमारे घर की जितनी भी नेगेटिविटी है वह दूर हो जाती है। और अच्छी एनर्जी हमारे घर में आने लगती है। कलश में अगर कुछ जल बच जाए तो उसे अपने घर में लगे तुलसी के पौधे में डाल दें। यदि किसी कारण वश तुलसी का पौधा आपके घर में नहीं है तो आप किसी भी पवित्र पेड़ में वह जल डाल सकते हैं। इसके बाद कलश स्थापना के दौरान हम लोग कलश में जो सिक्का डालते हैं उसे निकाल कर अपनी तिजोरी अथवा धन रखने की जगह पर किसी लाल कपड़े में बांधकर रख लीजिए। यह सिक्का आपके घर में समृद्धि लाता है। आप जहां भी उस सिक्के को रखेंगे उस जगह पर पैसे की कभी कमी नहीं रहेगी।

नवरात्रि के दौरान ज्वारों का बहुत ही बड़ा महत्व होता है। क्योंकि ज्वारे तो सभी लोग बोते हैं लेकिन सभी लोगों के द्वारा बोए गए ज्वारे एक जैसे नहीं होते हैं। सब लोगों के ज्वारे की ग्रोथ भी अलग -अलग होती है। किसी के ज्वारे बहुत अच्छे होते हैं और किसी के ज्वारे छोट-छोटे होते हैं। ज्वारों को इस तरह से होना अपने आप में शुभ और अशुभ का सूचक भी होता है। यदि आपके ज्वारे ऊपर से हरे हैं और नीचे से सफेद हैं तो यह शुभ संकेत होता है। इससे माना जाता है कि हमारा आने वाला समय बहुत ही अच्छा होगा। छोटे और अच्छी दशा में ज्वारे नहीं होने के संकेत से माना जाता है कि हमारे जीवन में आने वाले दिन परेशानियों वाले हो सकते हैं। नवरात्रि के बाद हम ज्वारों में से कुछ पत्तियों को खींचकर बाहर निकाल लेते हैं और उन पत्तियों को घर में बने मंदिर में रख दें। ऐसा करने से ये ज्वारे अभिमंत्रित हो जाते हैं। और जब हम पूजा की समाप्ति के बाद इन ज्वारो को उठाकर या तो आप अपनी तिजोरी में रख लीजिए अथवा किसी पवित्र स्थान पर रख दें। इसके बाद हम लोग पुन: तीन, पांच अथवा सात की संख्या में निकालें और फिर आपके घर भोजन करने आई कन्याओं की थाली में परोस दें। इसके बाद आप ज्वारे के बर्तन से ज्वारे के ग्रीन भाग को काट लें और जूसर-मिक्सर में डालकर इसका रस बना लें। और ज्वारे के इस रस को प्रसाद के रुप में अपने घर-परिवार के सदस्यों में वितरित कर दें।

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