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Chaturmas 2021 : साल 2021 में 118 दिन योग निद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु, जानें चातुर्मास से जुड़ी ये विशेष बातें

  • चातुर्मास 20 जुलाई से शुरु होकर 15 नवंबर 2021 तक रहेगा।
  • इस साल 3 महीने 26 दिन तक रहेगा देवशयन

Chaturmas 2021 : साल 2021 में 118 दिन योग निद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु, जानें चातुर्मास से जुड़ी ये विशेष बातें
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Chaturmas 2021 : साल 2021 में 118 दिन योग निद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु, जानें चातुर्मास से जुड़ी ये विशेष बातें    

Chaturmas 2021 : 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। इसके साथ ही चार महीने तक शादी, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाएंगे। हालांकि इन दिनों में खरीदारी, लेन-देन, निवेश, नौकरी और बिजनेस जैसे नए कामों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। इस साल भगवान विष्णु 118 दिन योग निद्रा में रहेंगे। इस दौरान संत और आम लोग धर्म-कर्म, पूजा-पाठ और आराधना में समय बीताएंगे। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि पिछले साल अधिकमास होने से भगवान विष्णु ने 148 दिन क्षीरसागर में आराम किया था। इस बार वे 20 जुलाई से 14 नवंबर तक योग निद्रा की अवस्था में रहेंगे। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में सृष्टि को संभालने और कामकाज संचालन का जिम्मा भगवान भोलेनाथ के पास रहेगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे पर विवाह समेत मांगलिक काम नहीं होंगे।

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ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस साल देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को पड़ेगी। इसलिए मांगलिक कार्य जुलाई तक ही किए जाएंगे। इसके बाद मांगलिक कार्य जैसे यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षाग्रहण, यज्ञ, गृहप्रवेश नहीं किए जाते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहते हैं। इनमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसमें आषाढ़ के 15 और कार्तिक के 15 दिन शामिल है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। ऐसा कहा जाता है कि चातुर्मास आरंभ होते ही भगवान विष्णु धरती का कार्य भगवान शिव को सौंपकर खुद विश्राम के लिए चले जाते हैं। इसीलिए इस दौरान शिव आराधना का भी बहुत महत्व है। सावन का महीना भी चातुर्मास में ही आता है। इसलिए इस महीने में शिव की अराधना शुभ फल देती है।

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खास होता है आषाढ़ महीना

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू कैलेंडर में आषाढ़ साल का चौथा माह है। आषाढ़ सनातन धर्म में धार्मिक माह भी माना गया है। इस माह में भगवान विष्णु, भगवान शिव व मां दुर्गा की गुप्त नवरात्र के दौरान पूजा की जाती है। माना जाता है कि इसी महीने में सभी देवी देवता विश्राम के लिए जाते हैं। वहीं भारत में इस समय काफी बारिश होने के कारण इस माह को वर्षा ऋतु का महीना भी कहा जाता है।

चातुर्मास के महीने

विख्यात भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि चातुर्मास की शुरुआत हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ माह से होती है। चातुर्मास आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी यानि इस बार मंगलवार 20 जुलाई 2021 से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलेगा। जो कि 15 नवंबर को है। यानि इसकी अवधि 4 महीने की होगी।

श्रावण

आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी से श्रावण शुक्ल एकादशी तक

(20 जुलाई से 18 अगस्त)

भाद्रपद

श्रावण शुक्लपक्ष की एकादशी से भाद्रपद शुक्लपक्ष की एकादशी तक

(18 अगस्त से 17 सितंबर)

आश्विन

भाद्रपद शुक्लपक्ष की एकादशी से आश्विन शुक्लपक्ष की एकादशी तक

(17 सितंबर से 16 अक्टूबर)

कार्तिक

आश्विन शुक्लपक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी तक

(16 अक्टूबर से 15 नवंबर)

देवशयनी एकादशी पर शुभ संयोग

विख्यात कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस साल देवशयनी एकादशी के दिन दो शुभ संयोग बन रहे हैं। इन शुभ संयोग के बनने से एकादशी का महत्व और बढ़ रहा है। इस साल देवशयनी एकादशी के दिन शुक्ल और ब्रह्म योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योग को शुभ योगों में गिना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इन योग में किए गए कार्य से मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

118 दिनों तक भगवान शिव करेंगे सृष्टि का संचालन

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के विश्राम करने से सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। इस दौरान सभी तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, बस विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इस दौरान भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करना चाहिए।

चातुर्मास में इन पर्वों की रहती है धूम

विख्यात भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि चातुर्मास में सबसे पहले सावन का महीना आता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस माह में भगवान शिव की अराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके बाद गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक भगवान गणेश की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi।com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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