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Krishna Vani : ऐसा हो पति पत्नी का संबंध, तो जीवन की बड़ी से बड़ी खाई को भी कर जाओगे आसानी से पार

Krishna Vani : भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त जनमानस को बताया था कि संसार में पति-पत्नी का संबंध सबसे बड़ा संबंध माना जाता है। सप्तपदी लेकर सात जन्मों तक दोनों एक -दूसरे के साथ जुड़ जाते हैं और एक-दूसरे के अर्द्धांग बन जाते हैं। अर्थात अर्द्ध यानि आधा-आधा अंग।

Krishna Vani : ऐसा हो पति पत्नी का संबंध, तो जीवन की बड़ी से बड़ी खाई को भी कर जाओगे आसानी से पार
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Krishna Vani : भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त जनमानस को बताया था कि संसार में पति-पत्नी का संबंध सबसे बड़ा संबंध माना जाता है। सप्तपदी लेकर सात जन्मों तक दोनों एक -दूसरे के साथ जुड़ जाते हैं और एक-दूसरे के अर्द्धांग बन जाते हैं। अर्थात अर्द्ध यानि आधा-आधा अंग।

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अपना समस्त जीवन किसी के साथ बांटना, किन्तु क्या संसार के सभी पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ अपना समस्त जीवन बांट सकते हैं। क्या इसमें सभी लोग सक्षम रह पाते हैं। अपना जीवन किसी के साथ बांटने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है स्वीकृति। यानि एक-दूसरे को मन से स्वीकार करना। सामने वाले व्यक्ति को स्वीकार करना, उसकी अच्छाईयां भी और उसकी बुराईयां भी दोनों को स्वीकार करना। यानि सम्पूर्णत: रूप से व्यक्ति को स्वीकार करना होगा। तभी ये संबंध बढ़ेगा और तभी ये संबंध और भी सुन्दर बनेगा।

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एक-दूसरे के दोष ढूंढना, उन्हें गिनाना, ये सब केवल और केवल एक ही कार्य करता है, कि आपके संबंध के जीवन का नाश करना। यानि एक-दूसरे के दोष ढूंढने और उन दोषों को गिनाने से अथवा एक-दूसरे पर दोषारोपण करने से आपके सुन्दर संबंध का नाश हो जाता है। जबकि बदले में होना ये चाहिए कि आप दोनों ही एक-दूसरे के दोषों को समझकर उन्हें आभास करवाएं बगैर ही उन्हें सुधार देना चाहिए। उनकी कमियों को उनकी शक्ति बना देना चाहिए। यहीं है दांपत्य जीवन और यही होता है बुराईयों का दमन और यही होता है गुणों का सुधरना।


हर संबंध की नींव विश्वास होता है। तो प्रश्न ये होता है कि विश्वास किस पर किया जाए। ये समझने के लिए पहले आपको ये समझना होगा कि बांधने में काम आने वाली रस्सी गुथी कैसे जाती है। हर रस्सी में तीन डोरियां होती हैं। जिन्हें आपस में गूंथा जाता है। बस विश्वास के साथ भी यही होता है। यदि आप उसके साथ विश्वास का बंधन जोड़ें जो आपके जीवन की इन तीनों डोरियों को जानता है, समझता है।


पहला डोरी यानि आपकी मुस्कान के पीछे छिपी आपकी पीड़ा, दूसरी डोरी यानि आपके क्रोध के पीछे छिपा आपका प्रेम और तीसरी डोरी यानि आपके मौन के पीछे छिपी आपके शब्दों की ज्वालामुखी, आपकी विवशता। तो जो व्यक्ति आपके जीवन की ये तीनों डोरियां यानि ये तीन बातें जानता है, यदि उसके साथ आप अपने विस्वास का बंधन बांधें तो उसके सहारे जीवन की बड़ी से बड़ी खाई को भी आप पार कर सकते हैं।

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