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Jyotish Shastra: शनि की महादशा से बचने के लिए करें इन मंत्रों का जाप, मिलेगा शुभ परिणाम

Jyotish Shastra: भगवान शनिदेव को न्याय और दण्ड का देवता कहा हैं। शनिदेव वो मनुष्य को उसके कर्मों के मुताबिक दण्ड और शुभ अशुभ फल प्रदान करते हैं। इसी कारण लोगों में भगवान शनिदेव के प्रति डर की भावना बनी रहती है।

Jyotish Shastra: शनि की महादशा से बचने के लिए करें इन मंत्रों का जाप, मिलेगा शुभ परिणाम
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Jyotish Shastra: भगवान शनिदेव को न्याय और दण्ड का देवता कहा हैं। शनिदेव वो मनुष्य को उसके कर्मों के मुताबिक दण्ड और शुभ अशुभ फल प्रदान करते हैं। इसी कारण लोगों में भगवान शनिदेव के प्रति डर की भावना बनी रहती है। जबकि शास्त्रों के अनुसार शनिदेव अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को शुभ और बुरे कर्म करने वाले व्यक्ति को अशुभ फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष के अनुसार, 11 अक्टूबर 2021, से शनि की चाल वक्री से मार्गी हो रही है। जिसका लाभ उन राशि के जातकों को मिलेगा जिन पर शनि की साढ़े साती अथवा ढैय्या आदि महादशा चल रही है। शनि की वक्री चाल का आज अंतिम शनिवार है और शनिवार के दिन शनिदेव के मंत्रों का जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। वहीं शनि के मंत्रों का जाप करने से शनि अपनी मार्गी चाल में आपके लिए लाभप्रद और शुभ फल प्रदान कर सकते हैं। वहीं भगवान शनिदेव के मंत्रों का जप करने के लिए आप कुशा के आसन का प्रयोग करें। तो आइए जानते हैं शनिदेव के प्रभावशाली मंत्रों के बारे में...

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शनि मंत्र

शनि का बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

शनि का सामान्य मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

शनि का महामंत्र

ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥

शनि का पौराणिक मंत्र

ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

शनि दोष निवारण का मंत्र

ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।।

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।

शनि का वैदिक मंत्र

ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।

शनि गायत्री मंत्र

ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्

तांत्रिक शनि मंत्र

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

स्वास्थ्य के लिए शनि मंत्र

ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा। कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।।

शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्। दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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