Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Holi 2021 : होली की कहानी, जानें भगवान विष्णु ने अत्याचारी हिरण्यकश्यप से कैसे बचाई भक्त प्रहलाद की जान

  • होली की पारम्परिक कथा (Holi Animated Story)
  • होलिका दहन की कहानी ( holika dahan Story)
  • प्रहलाद की कहानी (Prahlada Story)

Holi 2021 :  होली की कहानी, जानें भगवान विष्णु ने अत्याचारी हिरण्यकश्यप से कैसे बचाई भक्त प्रहलाद की जान
X

Holi 2021 : हिन्दू सनातन धर्म में सभी व्रत-त्योहार को मनाने के पीछे कोई ना कोई कारण अवश्य मौजूद है जिसके कारण उन व्रत और त्योहारों को मनाने की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। ऐसे ही त्योहारों में से प्रमुख है हमारा होली का त्योहार। तो आइए जानते हैं होली की पारम्परिक कथा के बारे में जिसमें भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की उसके अत्याचारी पिता से कैसे रक्षा की।

Also Read : Vijaya Ekadashi 2021 : विजया एकादशी कब है, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

होली की पारम्परिक कथा, होलिका दहन, भक्त प्रहलाद की कहानी


प्राचीन काल में एक अत्याचारी राक्षस राज हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी से वरादन पा लिया कि संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे ना मार सके। ना ही वह रात में मरे और ना ही वह दिन में मरे, ना पृथ्वी पर मरे और ना वह आकाश में मरे। ना घर में मरे और ना बाहर मरे, यहां तक की कोई शस्त्र भी उसे ना मार पाएं। ऐसा वरदान पाकर हिरण्यकश्यप खुद को भगवान मानने लगा और वह चाहता था कि हर कोई भगवान विष्णु की तरह उसकी पूजा किया करें।


वहीं अपने पिता के आदेश का पालन ना करते हुए हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद ने उसकी पूजा करने से इंकार कर दिया और उसकी जगह भगवान विष्णु की पूजा करना शुरू कर दिया। प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और उस पर भगवान विष्णु की असीम कृपा थी।


अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान विष्णु की आराधना करता देखकर नाराज होने की वजह से हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को कई सजाएं दीं। जिनसे वह प्रभावित नहीं हुआ, इसके बाद हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका ने मिलकर एक योजना बनाई। कि वह प्रहलाद के साथ एक चिता पर बैठेगी, होलिका के पास एक ऐसा कपड़ा था जिसे ओढ़ने के बाद उसे आग में किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता था।


दूसरी तरफ प्रहलाद के पास खुद को बचाने के लिए कुछ भी नहीं था। जैसे ही आग जली वैसे ही भगवान विष्णु की कृपा से होलिका का वह कपड़ा उड़कर प्रहलाद के ऊपर चला गया और इस प्रकार प्रहलाद की जान बच गई और उसकी जगह होलिका उस आग में जल गई। यही कारण है कि होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।


होलिका दहन के दिन एक पवित्र अग्नि जलायी जाती है। जिसमें सभी तरह की बुराई, अहंकार और नकारात्मकता को जलाया जाता है और उसके अगले दिन हम लोग अपने प्रियजनों को रंग लगाकर त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं और इसके साथ ही नाच-गाने व स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ इस पर्व का मजा लेते हैं।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Next Story