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Hazrat Ali Birthday : हजरत अली कौन हैं, 1400 साल पहले मक्का में हुआ था जन्म

  • हजरत अली (Hazrat Ali) को अली, इब्री, अबी और तालिब के नाम से भी जाना जाता है।
  • हजरत अली का जन्म 13 रज्जब 24 हिजरी पूर्व को और ग्रोगेरियन कैलेंडर के अनुसार 17 मार्च 600 ईस्वी को हुआ था।
  • हजरत अली इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद साहब के चचेरे भाई और दामाद थे।

Hazrat Ali Birthday : हजरत अली कौन हैं, 1400 साल पहले मक्का में हुआ था जन्म
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Hazrat Ali Birthday : अली, इब्री, अबी तालिब या फिर जिन्हें हजरत अली (Hazrat Ali) के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 13 रज्जब 24 हिजरी पूर्व को और ग्रोगेरियन कैलेंडर के अनुसार 17 मार्च 600 ईस्वी को हुआ था। वो इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद साहब (Mohammad Sahab) के चचेरे भाई और दामाद थे। मौजूदा दौर में वो लोगों के बीच हजरत अली के नाम से मशहूर हैं। लेकिन इस साल 2021 में हजरत अली का जन्मदिन 25 फरवरी 2021, दिन बृहस्पतिवार को बनाया जा रहा है।

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बता दें कि शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम हजरत अली ही थे। हजरत पैगम्बर मोहम्मद साहब की बेटी फातिमा से हजरत अली की शादी हुई थी। हजरत अली के जन्मदिन के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे को उनके जन्मदिन की बधाई देते हैं तो उनके द्वारा कहे गए शांति संदेशों को भी याद करते हैं। हजरत अली ने लोगों को शांति और अमन का पैगाम दिया था। आइए जानते हैं हजरत अली आखिर कौन थे।

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हजरत पैगम्बर मोहम्मद साहब के बाद सुन्नी मुस्लमानों के चौथे खलीफा थे। इनका जन्म मक्का में हुआ था। हजरत अली के बेटे हुसैन ने कर्बला की लड़ाई में भूखे-प्यासे रहकर बताया कि जेहाद किसे कहते हैं। वहीं हजरत अली ने अमन और शांति का पैगाम दिया और बता दिया कि इस्लाम अहिंसा के पक्ष में है। उन्होंने कहा था कि इस्लाम इंसानित का धर्म है। उन्होंने हमेशा प्रेम और समाज से भेद-भाव हटाने की कोशिश करी। हजरत अली ने कहा था कि अपने दुश्मन से भी प्रेम किया करों तो एक दिन वह तुम्हारा दोस्त बन जाएगा। उनका कहना था कि अत्याचार करने वाला, उसमें सहायता करने वाला और अत्याचार से खुश होने वाला भी अत्याचारी ही है।


आज से करीब 1307 साल पहले यानि कि 660 ईस्वी में रमजान महीने की 30वी तारीख को कुफी की मस्जिद में सुबह की नमाज के दौरान हजरत अली की हत्या की गई थी उसके बावजूद उन्होंने अपने कातिल को माफ करने की बात कही। कहा जाता है कि हजरत अली अपने कातिल को जानते थे उसके बावजूद उन्होंने सुबह की नमाज के लिए उसे उठाया था और नमाज में शामिल किया था।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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