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Hayagriva Jayanti 2020 Date : हयग्रीव जयन्ती 2020 में कब है,जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व,पूजा विधि और कथा

Hayagriva Jayanti 2020 Date : हयग्रीव जंयती के दिन भगवान विष्णु के हयग्रीव रूप की पूजा की जाती है। इस दिन को भगवान हयग्रीव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान हयग्रीव की पूजा करने से बल,विद्या और बुद्धि का वरदान प्राप्त होता है तो चलिए जानते हैं हयग्रीव जयंती 2020 में कब है(Hayagriva Jayanti 2020 Mein kab Hai), हयग्रीव जयंती का शुभ मुहूर्त (Hayagriva Jayanti Shubh Muhurat), हयग्रीव जयंती का महत्व (Hayagriva Jayanti Importance), हयग्रीव जयंती की पूजा विधि (Hayagriva Jayanti Puja Vidhi) और हयग्रीव जयंती की कथा (Hayagriva Jayanti Story)

Hayagriva Jayanti 2020 Date : हयग्रीव जयन्ती 2020 में कब है,जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व,पूजा विधि और कथा
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Hayagriva Jayanti 2020 Date : हयग्रीव जयन्ती 2020 में कब है,जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व,पूजा विधि और कथा

Hayagriva Jayanti 2020 Date : हयग्रीव जयंती (Hayagriva Jayanti) को भगवान हयग्रीव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को मुख्य रूप से तमिलनाडू में मनाया जाता है। शास्त्रों के श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन ही भगवान हयग्रीव (Lord Hayagriva) का जन्म हुआ था तो चलिए जानते हैं हयग्रीव जयंती 2020 में कब है, हयग्रीव जयंती का शुभ मुहूर्त, हयग्रीव जयंती का महत्व, हयग्रीव जयंती की पूजा विधि और हयग्रीव जयंती की कथा।


हयग्रीव जयन्ती 2020 तिथि (Hayagriva Jayanti 2020 Tithi)

3 अगस्त 2020

हयग्रीव जयंती 2020 शुभ मुहूर्त (Hayagriva Jayanti 2020 Shubh Muhurat)

हयग्रीव जयन्ती मुहूर्त - शाम 4 बजकर 29 मिनट से शाम 7 बजकर 10 मिनट तक

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - रात 09 बजकर 28 मिनट से (2 अगस्त 2020)

पूर्णिमा तिथि समाप्त - रात 09 बजकर 28 मिनट तक (03 अगस्त 2020 )


हयग्रीव जयंती का महत्व (Hayagriva Jayanti Importance)

हयग्रीव जयंती श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है। यह दिन भगवान हयग्रीव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। हयग्रीव को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने यह अवतार सभी वेदों की रक्षा के लिए लिया था और इन सभी वेदों को ब्रह्मा जी को देकर पुन: स्थापित कराया था।

भगवान हयग्रीव का स्वरूप अद्भुत है उनका सिर घोड़े का है और उनका शरीर इंसान का है। भगवान विष्णु के इस अवतार का उद्देश्य राक्षसों से चुराए गए वेदों को पुनः प्राप्त करना था। इस दिन को ब्राह्मण समुदाय के द्वारा उपकर्मा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान हयग्रीव की पूजा करने से उनका पूर्ण आर्शीवाद प्राप्त होता है और मनुष्य के जीवन की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।


हयग्रीव जंयती पूजा विधि (Hayagriva Jayanti Puja Vidhi)

1. हयग्रीव जयंती के दिन साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।

2. इसके बाद एक चौकी पर भगवान गणेश और भगवान हयग्रीव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3. मूर्ति स्थापित करने के बाद पहले भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद भगवान हयग्रीव को पंचामृत से स्नान कराएं

4. इसके बाद उन्हें वस्त्र,आभूषण, फल, फूल आदि अर्पित करें और ऊं नमोभगवते आत्मविशोधनाय नम: मंत्र का जाप करते हुए उन्हें तिलक करें।

5.तिलक के बाद भगवान हयग्रीव की कथा पढ़ें और उनकी आरती करने के बाद उन्हें प्रसाद का भोग लगाएं।


हयग्रीव जयंती कथा (Hayagriva Jayanti Story)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी एक साथ बैठे थे। भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को देखकर मुस्कुराने लगे। जिसे देखकर माता लक्ष्मी को क्रोध आ गया। उन्हें लगा की भगवा विष्णु उनका उपहास कर रहे हैं। जिसके कारण उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि आपका सिर धड़ से अलग हो जाए। जिसके बाद भगवान विष्णु को एक बार राक्षसों से युद्ध करना पड़ा।

जिसमें वह बहुत थक गए और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उस पर अपना सिर रखकर सो गए।कुछ समय बाद देवताओं ने यज्ञ किया और भगवान विष्णु को जगाने के लिए धनुष पर से प्रत्यंचा हटा दी। जिसके कारण भगवान विष्णु का सिर धड़ से अलग हो गया। जिसके बाद देवताओं ने इस समस्या के समाधान के लिए आदिशक्ति को बुलाया तब माता आदिशक्ति ने बताया की आप विश्वकर्मा की सहायता से इनके धड़ पर घोड़े का सिर लगा दें।

जिसके बाद देवताओं ने ऐसा ही किया और भगवान विष्णु के इस अवतार का नाम हयग्रीव रखा गया। भगवान विष्णु के इस श्राप में उन्हीं की माया थी। क्योंकि उन्हें एक राक्षस का वध करना था। जिसे देवी से यह वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु वही कर सकता है। जिसका सिर घोड़े का और धड़ मानव का हो।

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