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Gudi Padva 2021 : गुड़ी पड़वा कब है, एक क्लिक में जानें संपूर्ण पूजन सामग्री

  • चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा (Gudi Padva) के नाम से भी जाना जाता है।
  • गुड़ी पड़वा का पर्व 13 अप्रैल 2021, दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।

Gudi Padva 2021 :  गुड़ी पड़वा कब है, एक क्लिक में जानें संपूर्ण पूजन सामग्री
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Gudi Padva 2021 : चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2021 में गुड़ी पड़वा का पर्व 13 अप्रैल 2021, दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। महाराष्ट्र के आसपास के क्षेत्रों में तो लोगों को एक गुड़ी बनानी होती है उसमें एक बांस की पांच से छह फुट लंबी डंडी लेनी चाहिए और साथ में एक बॉर्डर वाली साड़ी या आप चाहे तो एक चुनरी अथवा दुपट्टा-ब्लाउज का पीस भी ले सकते हैं, लेकिन बॉर्डर वाली साड़ी और केसरिया रंग की साड़ी अथवा चटक रंग की साड़ी ही हमें लेनी चाहिए। इसके बाद आप एक कलश लेंगे, कलश आप चाहें तो तांबे अथवा पीतल का भी ले सकते हैं। इसके साथ ही आपको एक कॉटन वाली रस्सी लेनी है। तथा नीम और आम की टहनियां भी आपको लेनी हैं। इसके साथ ही आपको कुछ फूल-माला की भी जरुरत होती है। जिसे गुड़ी पर लगाया जाता है, बंदनवार की जरुरत होती है। तथा कुछ हमें पुष्प की भी जरुरत पड़ती है।

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वहीं पूजन के लिए भी हमें फूल और मालाओं की आवश्यकता होती है। वहीं पूजन में हमें एक पान के पत्ते की भी जरुरत पड़ती है इसलिए आपको एक पान का पत्ता भी लेना है। इसके साथ ही एक बताशे की माला, जिसे आप अपने घर पर भी बना सकते हैं अथवा बाजार आदि से भी खरीद सकते हैं। पूजन के लिए हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन और धूप-दीप तथा एक चांदी का सिक्का वहीं आप एक मौली ले लें और पूजा के लिए आप एक पानी वाला नारियल ले लें।

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गुड़ी पड‍़वा की पूजा में आप चाहें तो कलश की भी स्थापना कर सकते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म के अनुसार, चैत्र नवरात्रियों में कलश की स्थापना देवी मां के सामने ही हो जाती है, तो इसलिए अपने घर में किसी दूसरे कलश की स्थापना नहीं की जाती है।

हिन्दू धर्म के अनुसार, सभी व्रत फलाहारी होते हैं। क्योंकि इसी दिन से चैत्र नवरात्रियां प्रारंभ हो जाती है और व्रती लोग इस दौरान अन्न का सेवन नहीं करते हैं, तो इसलिए गुड़ी पड़वा के पूजन के लिए भी अन्न का कोई भी भोग अथवा प्रसाद नहीं बनाया जाता है।

गुड़ी पड़वा में पूजन और भोग के लिए आप चाहें तो साबुदाना की खीर भोग और प्रसाद के लिए बना सकते हैं और काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, इलायची, पीपल, सुपारी आदि चीजों को भी आप भगवान को अर्पित कर सकते हैं। तथा भगवान को अर्पित की गई उस सामग्री को आप बाद में चाय आदि में यूज कर सकते हैं और साथ ही जो भी मौसमी फल उपलब्ध हों आप उन सभी फलों को भी ले सकते हैं।

गुड़ी पड़वा के दिन से हिन्दू नववर्ष की शुरूआत होती है, इसलिए आप चाहें तो इस दिन नया कैलेंडर लाकर उसका भी पूजन कर सकते हैं। अथवा आप नया पंचांग लाकर उसका भी पूजन कर सकते हैं।

अगर आप गुड़ी भी नहीं बनाना जानते हैं अथवा गुड़ी बनाना नहीं चाहते हैं तो आप बाजार से मातारानी के झंडे भी गुड़ी के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि हिन्दू धर्म में गुड़ी का अर्थ विजय पताका होता है। इसलिए हिन्दू सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को इस गुड़ी पड़वा के दिन यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर हिन्दू नववर्ष के दिन अपने घर के ऊपर एक ध्वजा जरुर लगानी चाहिए।

ये ध्वजा बहुत ही शुभ मानी जाती है। तथा इस सभी सामग्री के साथ में आपको रंगोली बनाने के लिए रंगों की आवश्यकता भी होती है और एक चौकी अथवा पटा की भी जरुरत पड़ेगी और उसके ऊपर बिछाने के लिए आपको पीला या लाल वस्त्र भी चाहिए।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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