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Gochar 2021 : ग्रहों के सेनापति मंगल और भौतिक सुखों के दाता शुक्र छह सितंबर को बदलेंगे राशि, जानें इनके शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय

Gochar 2021 : 06 सितंबर को कन्या राशि में ग्रहों के सेनपति मंगल ग्रह का आगमन हो रहा है और तुला राशि में अमृत संजीवनी और भौतिक सुखों के दाता शुक्र ग्रह आ रहे हैं। बीते एक-डेढ़ महीने तक मंगल सिंह राशि में सूर्य के साथ थे। इस अवधि में वर्षा का मौसम होते हुए भी बेतहाशा गर्मी, उमस, विश्व में अग्नि का तांडव मचा रहा। जब सूर्य और मंगल सिंह राशि में एक साथ बैठते हैं तो अग्निकांड, भीषण गर्मी या रक्तपात जैसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।

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Gochar 2021 : 06 सितंबर को कन्या राशि में ग्रहों के सेनपति मंगल ग्रह का आगमन हो रहा है और तुला राशि में भौतिक सुखों के दाता शुक्र ग्रह आ रहे हैं। बीते एक-डेढ़ महीने तक मंगल सिंह राशि में सूर्य के साथ थे। इस अवधि में वर्षा का मौसम होते हुए भी बेतहाशा गर्मी, उमस, विश्व में अग्नि का तांडव मचा रहा। जब सूर्य और मंगल सिंह राशि में एक साथ बैठते हैं तो अग्निकांड, भीषण गर्मी या रक्तपात जैसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। मंगल 06 सितंबर को प्रातः 03:58 बजे कन्या राशि में आएंगे। यद्यपि कन्या राशि मंगल की शत्रु राशि है, किंतु बीते दो माह से जारी प्रकृति में बदलाव एवं आगजनी हिंसा पर रोक की उम्मीद है। इसी के साथ शुक्र भी 06 सितंबर को प्रातः 00:50 बजे तुला राशि में आ रहे हैं। तुला राशि शुक्र के स्वराशि है जिससे प्रकृति में खास बदलाव होंगे। कन्या राशि में मंगल छह सितंबर से 21 अक्टूबर तक जबकि शुक्र तुला राशि में छह सितंबर से दो अक्टूबर तक रहेंगे।

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ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सभी नौ ग्रहों का अपना स्वभाव और अलग-अलग कारक तत्व होते हैं। ज्योतिष विज्ञान में मंगल ग्रह को सभी ग्रहों का सेनापति माना जाता है। मंगल का राशि परिवर्तन सभी राशियों पर प्रभाव डालता है। मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, शक्ति और शौर्य का कारक माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह शुभ भाव में होते हैं ऐसे लोग काफी बुद्धिमान, प्रतापी और ऊर्जावान होते हैं। ज्योतिष में मंगल को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी माना जाता है। मंगल ग्रह कर्क राशि में ही नीच के और मकर राशि में उच्च राशि के माने जाते हैं। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि, वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक, शारीरिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शोहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना जाता है। शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है और मीन इसकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इसकी नीच राशि कहलाती है। शुक्र को 27 नक्षत्रों में से भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। ग्रहों में बुध और शनि ग्रह शुक्र के मित्र ग्रह हैं और तथा सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं। अमृत संजीवनी के मालिक शुक्र पृथ्वी के साथ हैं और शुक्र के पास अमृत संजीवनी है।

मंगल और शुक्र के गोचर का शुभ-अशुभ प्रभाव

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड भूकंप गैस दुर्घटना वायुयान दुर्घटना होने की संभावना मंगल की वजह से दुर्घटना होने की आशंका है। देश के कुछ हिस्सों में हवा के साथ बारिश रहेगी। भूकंप या अन्य तरह से प्राकृतिक आपदा आने की भी आशंका है। मंगल के कारण जनजीवन सामान्य होगा। मौसम भी बदलेगा और बारिश भी अच्छी होगी। इसके अलावा देश में आपदा में भी कमी आएगी। कानूनी मामलों में वृद्धि होगी। देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ रहेगा। खाने की चीजों की कीमतें सामान्य रहेंगी। सब्जियां, तिलहन और दलहन की कीमतें कम होंगी। भौतिक सुख और वैवाहिक सुख में वृद्धि होगी। मशीनरी सामान महंगे हो सकते हैं। व्यापार में तेजी रहेगी। सोने चांदी के भाव में वृद्धि होगी। दूध से बनी चीजों का उत्पादन बढ़ सकता है। रोजगार के क्षेत्रों में वृद्धि होगी। आय में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही राजनीति में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। शुक्र के अशुभ प्रभाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी होती है।

पूजा-पाठ और दान करें

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि, मंगल के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। लाल चंदन या सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए। तांबे के बर्तन में गेहूं रखकर दान करने चाहिए। लाल कपड़ों का दान करें। मसूर की दाल का दान करें। शहद खाकर घर से निकलें। हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। मंगलवार को बंदरों को गुड़ और चने खिलाएं।

वहीं राजवेदिया गोपालकृष्ण कन्हैयालाल ओझा ने बताया कि, शुक्र के अशुभ असर से बचने के लिए लक्ष्मी माता की उपासना करें। सफेद वस्त्र दान करें। भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे और कुत्ते को दें। शुक्रवार का व्रत रखें और उस दिन खटाई न खाएं। चमकदार सफेद एवं गुलाबी रंग का प्रयोग करें। श्री सूक्त का पाठ करें। शुक्रवार के दिन दही, खीर, ज्वार, इत्र, रंग-बिरंगे कपड़े, चांदी, चावल इत्यादि वस्तुएं दान करें।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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