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Garud Puran : मृत्यु के बाद इस तरह 47 दिन का सफर तय करके यमलोक पहुंचती है जीवात्मा, जानें...

  • मनुष्य का जीवन जितना सत्य है, उतना ही बड़ा सत्य है उसकी मृत्यु।
  • जो इस मृत्युलोक में आया है एक न एक दिन उसकी मृत्यु होनी निश्चित है।
  • पैसा कमाने के लिए मनुष्य अपने जीवन में बहुत पाप करता है।

Garud Puran : मृत्यु के बाद इस तरह 47 दिन का सफर तय करके यमलोक पहुंचती है जीवात्मा, जानें...
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Garud Puran : मनुष्य का जीवन जितना सत्य है, उतना ही बड़ा सत्य है उसकी मृत्यु। जो इस मृत्युलोक में आया है एक न एक दिन उसकी मृत्यु होनी निश्चित है। परन्तु मनुष्य यह बात जानते हुए भी इस सच्चाई से भागता है और पैसा कमाने के लिए अपने जीवन में ना जानें कितने पाप करता है। जिसका कारण है मृत्यु के इस रहस्य की जानकारी ना होना। मृत्यु के बाद पाप कर्म के कारण उसकी आत्मा को ना जानें कितने कष्ट भोगने पड़ते हैं। जिसका वर्णन हिन्दू धर्म के 18 महापुराणों में से एक गरुड़ पुराण में किया गया है। तो आइए जानते हैं मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है।

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गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस मनुष्य की मृत्यु होने वाली होती है वह बोलना बंद कर देता है। उसकी सभी इंद्रिया शिथिल पड़ जाती हैं। जब अंतिम समय निकट आता हैतब परमात्मा के द्वारा उसे एक दिव्य दृष्टि मिलती है जिससे वह सारे संसार को एक रूप में देखने लगता है।

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के समय दो यमदूत आते हैं जो देखने में बड़े ही भयानक होते हैं। यदि मरने वाले प्राणी ने पुण्यकर्म किया है तो वह आसानी से अपने प्राण त्याग देता है। परन्तु यदि वह पापी होता है तो वह यमदूत के भय से ग्रस्त होकर बड़े ही कष्ट से अपने प्राण त्यागता है। तत्पश्चात यमदूत उसे यमलोक ले जाते हैं।

यमलोक का रास्ता अंधेरे और गर्म पानी से भरा होता है, फिर यमलोक पहुंचने पर उसे यातनाएं दी जाती हैं। फिर उसे यमराज के कहने पर 13 दिन तक उत्तम कार्यों को करने हेतु आकाश मार्ग ये फिर घर पर छोड़ दिया जाता है। घर आकर वह जीवात्मा पुन: अपने शरीर में प्रवेश करने का प्रयास करती है। किन्तु यमदूत के बंधन से वह मुक्त नहीं हो पाता और भूख-प्यास के कारण रोता रहता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति के वंशज को 10 दिन तक पिंडदान अवश्य करना चाहिए। क्योंकि पिंडदान से ही आत्मा को चलने की शक्ति प्राप्त होती है। तत्पश्चात मृत्यु के 13 दिन बाद यमदूत आत्मा को फिर से पकड़ लेते हैं और फिर शुरू हो जाती हैं यमलोक की यातनाएं।

इस सफर में आत्मा को 47 दिन तक वैतरणी नदी पार करनी होती है।इस तरह भूख-प्यास से बैचेन आत्मा यमलोक में पहुंचती है।

यमलोक में भगवान चित्रगुप्त उस प्राणी के सभी कर्मों का लेखा-जोखा यमराज को देते हैं। फिर उस आधार पर धर्मराज यह निश्चित करते हैं कि पापी आत्मा को किस नर्क में भेजा जाए।

सीख: इसलिए हमें अपने जीवन में धन-दौलत का लालच छोड़कर सच्चाई के रास्ते पर ही चलना चाहिए।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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