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Gangaur Puja 2021 : साल 2021 में गणगौर पूजा कब है, जानिए दिन तारीख व पूजा की विधि

  • गौरी पूजा का शुभ मुहूर्त (Gauri Puja Shubh Muhurt)
  • गणगौर पूजन की सामग्री (Gangaur worship materials)
  • गणगौर पूजा की विधि और महत्व (Method and importance of Gangaur worship)

Gangaur Puja 2021 : साल 2021 में गणगौर पूजा कब है, जानिए दिन तारीख व पूजा की विधि
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Gangaur Puja 2021 : साल 2021 में गणगौर पूजा यानि गौरी पूजा का शुभ मुहूर्त (Gauri Puja Shubh Muhurt) क्या रहेगा। गणगौर पूजा की सामग्री Gangaur worship materials), गणगौर पूजा की विधि और महत्व method and importance of Gangaur worship क्या है। आइए जानते हैं गणगौर पूजा के बारे में।


हिन्दू धर्म में गणगौर व्रत-पूजा का विशेष महत्व है। गणगौर का व्रत 18 दिनों तक चलता है। जो चैत्र मास के पहले दिन से शुरू होता है और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन तक मनाया जाता है। यानि होली के दिन से शुरू होकर 18 दिनों तक चलता है। कुछ जगह लोग आखिरी दिन ही इसकी पूजा करते हैं। यह पर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, आदि जगहों पर बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस व्रत को गौरी तीज या सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है।


गणगौर पूजा भगवान शिव व माता पार्वती जी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को सदा सुहागन रहने का वरदान दिया था। वहीं माता पार्वती ने सभी सुहागिन महिलाओं को सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद दिया।


महिलाएं इस पूजा को पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं सुन्दर पति पाने की कामना से इस पूजा को करती हैं।


गणगौर पूजा होली की रात से शुरू हो जाती है और इसे चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि तक रोज किया जाता है। वहीं चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पिंजरा कहा जाता है। इस दिन महिलाएं किसी पवित्र नदी या तालाब में जाकर गणगौर को पानी पिलाती हैं और फिर तृतीया तिथि के दिन उनका विसर्जन कर देती हैं।


गणगौर पूजा 2021

गणगौर व्रत पूजा प्रारंभ

29 मार्च 2021 दिन सोमवार

गणगौर व्रत पूजा समाप्त

15 अप्रैल 2021 दिन गुरुवार

पूजा का अंतिम दिन

15 अप्रैल 2021 दिन गुरुवार

तृतीया तिथि प्रारंभ

14 अप्रैल 2021 को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर

तृतीया तिथि समाप्त

15 अप्रैल 2021 दोपहर 03 बजकर 27 मिनट पर

पूजा का शुभ मुहूर्त

15 अप्रैल 2021 को सुबह 05 बजकर 15 मिनट से सुबह 06 बजकर 52 मिनट तक

पूजा का सबसे अधिक महत्व

गणगौर व्रत पूजा का सबसे अधिक महत्व आखिरी दिन का माना जाता है और पूजा का आखिरी दिन 15 अप्रैल 2021 को होगा।


गणगौर व्रत पूजा सामग्री

एक लकड़ी की चौकी अथवा पटरी, तांबे का कलश, काली मिट्टी, होली की राख, गोबर या मिट्टी के कुंडे, गमले, मिट्टी का दीपक, कुमकुम, हल्दी, चावल, बिंदी, मेंहदी, गुलाल और अबीर, काजल, घी, फूल, आम की पत्ती, पानी से भरा हुआ कलश, नारियल, सुपारी, गणगौर के कपड़े, गेंहू और बांस की टोकरी, चुनरी, कौड़ी, सिक्के, घेवर, हलवा, सुहाग का सामान, चांदी की अंगुठी, पूड़ी आदि।


गणगौर पूजा की विधि

  • इस व्रत को करने के लिए प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व प्रतिदिन की नित्य क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद आपको साफ-सुन्दर वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • इसके बाद पूजास्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करना चाहिए।
  • घर के शुद्ध और एकांत स्थान में पवित्र मिट्टी से 24 अंगुल चौड़ी और 24 अंगुल लंबी अर्थात चौकोर वेदी बनाकर केसर, चंदन तथा कपूर से उसपर चौक पूरा जाता है और बीच में देवी तथा शिव मूर्ति की स्थापना करके उसे फूलों से, फलों से, दूब से और रोली आदि से उसका पूजन किया जाता है।
  • पूजन में मां गौरी के 10 रूपों की पूजा की जाती है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi।com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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