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Jyotish Shastra : कारोबार बढ़ाने के लिए करें गजलक्ष्मी की पूजा, देती हैं राजयोग का वरदान

  • मां गजलक्ष्मी ही महालक्ष्मी का स्वरूप हैं।
  • नौकरी, प्रमोशन और कारोबार में वृद्धि के लिए की जाती है गजलक्ष्मी की पूजा

Jyotish Shastra : कारोबार बढ़ाने के लिए करें आप गजलक्ष्मी की पूजा, देती हैं राजयोग का वरदान
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Jyotish Shastra : माता गजलक्ष्मी की पूजा-अर्चना राजयोग के लिए की जाती है। मां गजलक्ष्मी की आराधना करने से व्यक्ति को अपने जीवन में मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है। गज को वर्षा करने वाले मेघों और उर्वरता शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। गज की सवारी करने के कारण यह उर्वरता और समृद्धि की भी देवी हैं। गज लक्ष्मी देवी को राजलक्ष्मी देवी भी कहा जाता है। क्योंकि इन्हीं की कृपा से धन, वैभव और समृद्धि का वरदान मिलता है।

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गजलक्ष्मी और महालक्ष्मी दोनों एक ही हैं। महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र को मां लक्ष्मी के सामने स्थापित करें और इस यंत्र की विधि-विधान से पूजा करें। यह यंत्र आपके धन में वृद्धि के लिए बहुत उपयोगी होता है। महालक्ष्मी यंत्र के पूजन से जीवन से परेशानियां और दरिद्रता का शमन होता है। महालक्ष्मी व्रत में दक्षिणावर्ती शंख में दूध मिश्रित गंगाजल डालकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा का अभिषेक करना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी की बहुत जल्दी ही कृपा प्राप्त होती है। गजलक्ष्मी की विशेष पूजा पितृपक्ष में अष्टमी के दिन की जाती है और शुक्रवार के दिन या महा निशा के दिन लाभ की वेला में कभी भी की जा सकती है।

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ऐसा है मां गज लक्ष्मी का स्वरूप

गजलक्ष्मी का स्वरूप चार भुजाधारी है। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी गज यानी हाथी के ऊपर आठ कमल की पत्तियों के समान आकार वाले सिंहासन पर विराजित होती है। इनके दोनों ओर भी हाथी खड़े होते हैं। चार हाथों में क्रमश: कमल का फूल, अमृत कलश, बेल और शंख होता हैं। इनकी उपासना संपत्ति और संतान देने वाली मानी गई है।

गज लक्ष्मी पूजा विधि

इस दिन पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें और मूर्ति के सामने श्रीयंत्र, सोने-चांदी के सिक्के और फल फूल रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी के आठ रूपों की मंत्रों के साथ कुमकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें। महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी की हाथी पर बैठी हुई मूर्ति को लाल कपड़े पर रखकर विधि-विधान के साथ स्थापना करें। पूजा कर मां का ध्यान करें।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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