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मिट्टी के बर्तन में पकाकर खाएंगे खाना तो बनी रहेगी सेहत, घर में बना रहेगा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह

आजकल हमारे देश में पश्चिमी संस्कृति की ओर रुझान बढ़ रहा है। खाना बनाने के लिए लोग मिट्टी क बर्तनों को छोड़कर एल्युमिनियम और स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। जबकि मिट्टी के बर्तन में बना खाना आपकी सेहत के लिए जरुरत से ज्यादा फायदेमंद होता है। और साथ ही आपके घर में इन बर्तनों के इस्तेमाल से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बना रहेगा।

मिट्टी के बर्तन में पकाकर खाएंगे खाना तो बनी रहेगी सेहत, घर में बना रहेगा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह
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प्रतीकात्मक तस्वीर

आजकल हमारे देश में पश्चिमी संस्कृति की ओर रुझान बढ़ रहा है। खाना बनाने के लिए लोग मिट्टी के बर्तनों को छोड़कर एल्युमिनियम और स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। जबकि मिट्टी के बर्तन में बना खाना आपकी सेहत के लिए जरुरत से ज्यादा फायदेमंद होता है। और साथ ही आपके घर में इन बर्तनों के इस्तेमाल से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बना रहेगा।

प्राचीन काल में लोग मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाया करते थे इसलिए वे लोग बीमार कम पड़ते थे। मगर बदलते समय के साथ लोगों की किचन से मिट्टी के बर्तन कम होते गए और आधुनिक बर्तन आते गए। ये बर्तन उपयोग करने में तो आसान है लेकिन आपके शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।

अगर आप अधिक मात्रा में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं कर सकते तो आप इसकी बजाए मिट्टी के तवे पर रोटी बनाकर खाएं। इससे भी आप काफी हद तक बीमारियों से बचे रहेंगे। इसलिए हम आज आपको बताते हैं कि मिट्टी के तवे या बर्तनों में खाना बनाने से आपको क्या फायदे होते हैं।

तो इसलिए फायदेमंद है मिट्टी के बर्तन...

अधिकांश लोग नहीं जानते होंगे कि एल्युमीनियम के बर्तन में खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व, पीतल के बर्तन में 7 प्रतिशत पोषक और कांसे के बर्तन में 3 प्रतिशत पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। जबकि मिट्टी के बर्तन में खाना तैयार करने में आपके शरीर को 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। इसके अलावा भी मिट्टी के बर्तनों में खाना खाने या खाना पकाने के और भी बहुत फायदे हैं।

डाइटिशियन और न्यूट्रिशियन देते हैं मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने की सलाह

मिट्टी के बर्तन में बनी दाल और सब्जी में 100 प्रतिशत माइक्रो न्यूट्रीएंट्स रहते हैं जबकि प्रेशर कुकर में बनी दाल और सब्जी के 87 प्रतिशत पोषक तत्व एल्युमिनियम के पोषक-तत्वों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। इसलिए अब डाइटिशियन और न्यूट्रिशियन भी मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने की सलाह देने लगे हैं।

मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने के फायदे...

गैस से राहत : मिट्टी के तवे पर बनी रोटी खाने से गैस की समस्या दूर रहती है। अधिकांश लोगों को 6 से 9 घंटे लगातार ऑफिस में बैठने के कारण गैस की परेशानी होती है तो वे लोग मिट्टी के तवे पर बनी रोटी खाएं। कुछ ही दिनों में ही गैस से राहत मिलेगी।

बीमारियों से बचाव : मिट्टी के बर्तन खाने में मौजूद पोषक तत्वों को खत्म होने से रोकते है। जिससे हमारे शरीर को पूरे पोषक तत्व मिलते है, यह पोषक तत्व शरीर को बीमारियों से बचाने का काम करते हैं।

कब्ज नहीं होगी : भागदौड़ भरी जिंदगी और पश्चिमी जीवनशैली अपनाने के बीच लोगों में कब्ज की समस्या आम हो गई है क्योंकि आजकल लोग बिजी होने के कारण जल्दी-जल्दी ऑफिस या काम पर जाने के लिए घर का बना खाना भूल जाते हैं और बाहर से मिलने वाले फॉस्ट फूड्स पर ही निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में कब्ज की परेशानी लोगों में आम हो गई है। अगर आपको भी इस तरह की कोई समस्या रहती है तो आप तवे पर बनी रोटी जरूर खाएं।

pH लेवल रहता है बैलेंस : मिट्टी के एल्कलाइन गुण भोजन में उपलब्ध एसिड के साथ प्रक्रिया कर शरीर में pH को निष्क्रिय या नियंत्रित करता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी है।

स्वादिष्ट भोजन : दूसरे बर्तनों की तुलना में मिट्टी के बर्तन में बना भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है। मिट्टी के बर्तन में भोजन को बनने में अधिक समय लगता है लेकिन ऐसा खाना आपको कई प्रकार की बीमारियों से बचाता है।

जल्दी खराब नहीं होता भोजन : जो खाना मिट्टी के बर्तन में बनाया जाता है, वह अधिक देर तक ताजा रहता है। क्योंकि मिट्टी के बर्तन में भोजन को बनाने में भी काफी अधिक समय लगने के कारण यह भोजन जल्दी खराब नहीं होता। और खाना ज्यादा देर तक ताजा ही रहता है।

मिनरल्स और विटामिन्स से भरपूर : मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से आपका भोजन ज्यादा पौष्टिक होता है क्योंकि यह आपके भोजन में कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम, सल्फर जैसे मिनरल्स और विटामिन्स को शामिल करता है।

ध्यान रखने योग्य बातें : मिट्टी के बर्तनों को इस्तेमाल करने से पहले करीब 12 घंटे पानी में भिगोकर रखें यानि रात भर इन बर्तनों को पानी में रखें और सुबह सुखाने के लिए रख दें। बड़े बर्तनों को बस पहली बार ही 12 घंटों के लिए भिगोना है और छोटे बर्तनों को जैसे गिलास, कटोरी, दही जमाने की हांडी चम्मच, कप आदि को 6 घंटे भिगोना काफी है। उसके बाद मध्यम आंच पर रखें और इसमें पके पौष्टिक भोजन का आनंद लें।

सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाते हैं मिट्टी के बर्तन : वास्तु के अनुसार हर व्यक्ति को मिट्टी या भूमि तत्व के पास ही रहना चाहिए। मिट्टी से बनी वस्तुएं सौभाग्य और समृद्धिकारक होती हैं। मिट्टी के बर्तनों में पकाए भोजन में ईश्वरीय तत्व माना जाता है। हर घर में मिट्टी का घड़ा अवश्य होना चाहिए। घड़े का पानी पीने से बुध और चंद्रमा का प्रभाव शुभ होता है। घड़े को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रखें। मानसिक रूप से परेशान हैं तो मिट्टी के घड़े से पौधे को पानी दें। जो लोग मंगल के कोप से प्रभावित हैं, उन्हें कोई भी पेय पदार्थ मिट्टी के बर्तन में ही पीना चाहिए। मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर घर की छत पर पक्षियों के लिए अवश्य रखें। मिट्टी से बनी भगवान की मूर्ति को घर में लाने से धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं। रोजाना तुलसी के पौधे के पास मिट्टी का दीया जलाएं। मिट्टी से बनी वस्तुओं या खिलौनों से अपने ड्राइंग रूम को सजाएं। इससे रिश्तों में मधुरता आती है। हर त्योहार पर घर में मिट्टी के दीये जलाएं। घर में मिट्टी के बर्तन रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

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