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जानिए दशहरा की पूजन सामग्री, पूजा विधि

दशहरा का त्यौहार बुराई पर भलाई की विजय का पर्व है। दशहरा का दिन नए व्यापार या किसी नए काम को शुरु करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं। नए वाहन, उपकरण, गहने, वस्त्र खरीदने के लिए दशहरा का दिन सबसे उत्तम माना जाता है।

जानिए दशहरा की पूजन सामग्री, पूजा विधि
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प्रतीकात्मक

दशहरा का त्यौहार बुराई पर भलाई की विजय का पर्व है। दशहरा का दिन नए व्यापार या किसी नए काम को शुरु करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं। नए वाहन, उपकरण, गहने, वस्त्र खरीदने के लिए दशहरा का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। दशहरा के दिन ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। और मां भवानी ने महिषासुर का वध भी दशहरा के दिन ही किया था। दशहरा के दिन अपने अस्त्र-शस्त्र की पूजा अवश्य करनी चाहिए। अस्त्र शस्त्रों की पूजा दशहरा के दिन करने से हमारे अस्त्र-शस्त्रों का प्रभाव बढ़ जाता है और वे ज्यादा शक्तिशाली होते हैं। अस्त्र शस्त्र का मतलब यानि की जीवन यापन के वह साधन जिनसे हम अपने जीवन यापन के साधन जुटाते हैं। तो आइए जानते हैं दशहरा की पूजन सामग्री, पूजा करने की विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में जरुरी बातें।

दशहरा की पूजन सामग्री

दशहरा की पूजन सामग्री में गाय का गोबर, ज्वारे, दही, कपास, धूप, दीप, अक्षत, आटा, सुपारी, चंदन, कुमकुम, जनेऊ आदि चाहिए।

दशहरा की पूजा विधि

दशहरा के दिन सुबह उठने के बाद रावण की पूजा जाती है। क्योंकि रावण एक ब्राह्मण और विद्वान भी था। इसलिए रावण दहन से पहले सुबह-सुबह रावण को पूजा भी जाता है। रावण पूजा से पहले सुबह-सुबह जल्दी ही अपने घर की साफ-सफाई आदि कर लेनी चाहिए। और पूरे घर को गेंदे और आम के पत्तों से सजाना चाहिए। स्नान और सफाई तथा घर की साज-सज्जा करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहन लेने चाहिए और पुरुषों को दशहरा के दिन सफेद कपड़े अवश्य पहनने चाहिए। दशहरा के दिन घर के सभी सदस्यों को जल्दी उठकर तैयार हो जाना चाहिए। दशहरा की पूजा सभी सदस्यों को मिलकर एक साथ ही करनी चाहिए। पूजा के लिए सबसे पहले रावण बनाया जाता है। और रावण बनाने के लिए गोबर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपके पास गोबर उपलब्ध ना हो तो आप आटे की लोई से भी रावण बना सकते हैं। सबसे पहले आप गोबर के दस गोले बनाएं। गोबर ना हो तो आप आटे के दस गोले बनाएं। और उन्हें बीच से थोड़ासा उठा दें। जिससे वे रावण के मुख के समान लगें। फिर आप इन गोलों को लाइन से सजाकर थोड़ा-थोड़ा आटा उन पर डाल दें। इसके बाद आप उन पर कपास डालेंगे। अगर आपके पास कपास नहीं है तो आप जनेऊ उाल सकते हैं। उसके बाद में आप रावण को दही और ज्वारे अर्पित करें। नवरात्रि पूजा के दौरान उपयोग में लाए गए ज्वारे ही रावण पूजा में प्रयोग किए जाते हैं। इसके बाद आप धूप-दीप से रावण की पूजा करें। और इसके बाद आप परिवार के सदस्यों समेत रावण की परिक्रमा करें। और इसके बाद आप भगवान विष्णु से प्रार्थना करें कि हे भगवान आप हमारे परिवार में खुशियां लाइए ताकि हम हमेशा सदमार्ग पर चलते रहें। ऐसी प्रार्थना करने के बाद आप भगवान विष्णु को प्रणाम करें।

हिन्दू धर्म में बहुत सारे पेड़ पौधों की पूजा होती है। जैसे पीपल, बरगद, आक, डाक, तुलसी, आदि बहुत सारे ऐसे पेड़-पौधे होते हैं जिनकी पूजा की जाती है। वैसे ही शमी के वृक्ष की भी पूजा की जाती है। तथा शमी वृक्ष की पूजा करने के भी बहुत सारे कारण हैं। पहला कारण तो ये है कि रावण से युद्ध करने से पहले भगवान राम ने शमी के वृक्ष को प्रणाम करके उनसे आशीर्वाद लिया था। और उसके बाद श्रीराम रावण से युद्ध करने के लिए गए। और रावण का वध किया। और दूसरा कारण यह है कि महाभारत काल में जब पांडवों ने अपने अज्ञातवात के समय शमी वृक्ष में ही अपने अस्त्र-शस्त्रों को छिपाया था। इसलिए दशहरा के दिन शमी वृक्ष की पूजा की जाती है।

शमी वृक्ष की पूजा विधि

दोपहर के समय शमी वृक्ष के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। और वहां की भूमि को साफ करके चंदन और कुमकुम से अष्टदल कमल का निर्माण करें। और फिर संपूर्ण सामग्री लेकर देवियों का ध्यान करते हुए पूजन करें। साथ ही आप शमी वृक्ष की परिक्रमा करें। और आपकी जो भी मनोकामना है उसे आप शमी वृक्ष के सम्मुख कहें।

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