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Dussehra 2020 Mein Kab Ka Hai : दशहरे के दिन इस पक्षी के दर्शन से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम, आप भी जानें

Dussehra 2020 Mein Kab Ka Hai : विजयदशमी (Vijayadashami) को दशहरे के नाम से भी जाना जाता है। साल 2020 में यह त्योहार 25 अक्टूबर 2020 (25 October 2020) को मनाया जाएगा। इस दिन रावण दहन किया जाता है। लेकिन यदि आपको इस दिन इस दुर्लभ पक्षी के दर्शन हो जाए तो आपको सदैव अपने कामों में विजय प्राप्त होगी तो आइए जानते हैं कौन सा है वो पक्षी जिसके दशहरे पर दर्शन मात्र से ही बन जाते हैं सभी बिगड़े काम।

Dussehra 2020 Mein Kab Ka Hai : दशहरे के दिन इस पक्षी के दर्शन से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम, आप भी जानें
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Dussehra 2020 Mein Kab Ka Hai : दशहरे के दिन इस पक्षी के दर्शन से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम, आप भी जानें

Dussehra 2020 Mein Kab Ka Hai : दशहरे का त्योहार (Dussehra Festival) बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम (Lord Rama) ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए दशहरे को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विजयदशमी के दिन एक ऐसा पक्षी भी है। जिसके दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है तो चलिए जानते हैं कौन सा है वो पक्षी जिसके दर्शन करने से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम

दशहरे पर नीलकंठ पश्री के दर्शन का महत्व (Dussehra Per Neelkanth Pakshi Ke Darshan Ka Mahatva)

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माने जाने वाला त्योहार विजयदशमी और दशहरे के नाम से जाना जाता है। इस दिन माना जाता है कि नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने से कई बिगड़े काम बन जाते हैं। नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है। दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने से पैसों और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं जो काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलती है।

पुराणों के अनुसार जब भगवान श्री राम रावण का वध करने जा रहे थे। उसी समय पर उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे। इसके बाद भगवान श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त हुई थी। यही कारण है कि नीलकंठ पक्षी का दिखना शुभ माना जाता है। बताया जाता है कि भगवान श्री राम ने इस पक्षी के दिखने के बाद ही रावण पर विजय प्राप्त की थी। विजयदशमी का पर्व जीत का पर्व है। विजयदशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शनों की परंपरा वर्षों से जुड़ी हुई है।

लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद जब भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। उस समय भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण को साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी और ब्राह्मण हत्या के पाप से खुद को मुक्त कराया। उस समय भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रूप में धरती पर पधारे थे। नीलकंठ अर्थात् जिसका गला नीला हो। जनश्रुति और धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ही नीलकंठ हैं।

इसी कारण से इस पक्षी को भगनाव शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप दोनों माना जाता है। नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का ही रूप है। दशहरे पर भगवान शिव नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर विचरण करते हैं। इस दिन सभी लोग अपने शस्त्रों का पूजन भी करते हैं। सबसे पहले शस्त्रों पर जल छिड़ककर इन्हें पवित्र किया जाता है। इसके बाद महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शास्त्रों पर कुमकुम और हल्दी का तिलक कर हार पुष्पों से श्रृंगार कर मीठे का भोग लगाकर पूजन किया जाता और शाम के समय रावण दहन कर विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है।

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