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छींक कब शुभ और अशुभ होती है, जानें इसके प्रभाव

  • छींक को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं।
  • छींक को शकुन और अपशकुन की दृष्टि से भी देखा जाता है।

छींक कब शुभ और अशुभ होती है, जानें इसके प्रभाव
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हिन्दू धर्म में छींक को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं और इन सभी मान्यताओं को शगुन और अपशगुन से जोड़कर देखा जाता है। छींक को प्राय: अशुभ माना जाता है। बीमार व्यक्ति अगर बार-बार छींकता है तो इसे अपशकुन नहीं माना जाता, लेकिन वहीं स्वस्थ व्यक्ति एक से अधिक बार छींकता है तो इसे अपशकुन माना जाता है। छींक से जुड़े अनेक अपशुकन होते हैं। तो आइए जानते हैं छींक से जुड़े शकुन और अपशकुन के बारे में जो हमें लाभ और हानि की तरफ भी सकेत देते हैं।

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छींक के शुभ अशुभ प्रभाव

  1. रसोई में दूध उबलते समय यदि गृहिणी छींक दे तो आपत्तिजनक है।
  2. मार्ग में यदि गजराज छींक दे तो राज्य लाभ होता है।
  3. रास्ते में अथवा घर के बाहर यदि कुत्ता छींक दे तो विघ्न और विपत्ति की सूचना है, यदि कुत्ता एक से अधिक बार छींक दे तो विपत्ति के टल जाने की संभावना है।
  4. दु:स्थान, श्मशान तथा किसी दुर्घटना स्थल पर कोई व्यक्ति छींक मार देता है तो इसे वैदिक साहित्य में शुभ माना जाता है।
  5. भूकम्प, दुर्भिक्ष या महामारी की सूचना पर यदि जीव-जंतु तथा मनुष्य छींक दें तो अनिष्ट के दूर होने की संभावना रहती है।
  6. शुभ कार्य के लिए जाते समय यदि गाय या उसका बछड़ा छींक दे तो निश्चित कार्य सिद्धि होती है। यह शकुन धन वृद्धि का भी सूचक है।
  7. दवाई का सेवन करते समय यदि छींक आए और औषधि गिर जाए तो रोग का निवारण शीघ्र होता है।
  8. ऊंची छींक बड़ी ही उत्तम होती है।
  9. नीची छींक बड़ी दुखदायिनी होती है।
  10. चलते समय अपनी छींक बड़ा दुख देने वाली होती है।
  11. दाईं तरफ की छींक धन को नष्ट करती है।
  12. बाईं तरफ की छींक से सुख मिलता है।
  13. सामने की छींक लड़ाई-झगड़े को बतलाती है।
  14. पीछे की छींक से सुख से सुख मिलता है।
  15. शुभ कार्य के लिए गमन के समय यदि कोई छींक मार दे तो अपशकुन होता है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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