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Chaitra Navratri 2021 : जानें, कलश स्थापना की सबसे सरल विधि

  • हिन्दू धर्म में कलश पूजन और कलश स्थापना का अपना एक अलग ही महत्व होता है।
  • कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना गया है।
  • विशेष मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के दौरान कलश स्थापना की जाती है।

Chaitra Navratri 2021 : जानें, कलश स्थापना की सबसे सरल विधि
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Chaitra Navratri 2021 : हिन्दू धर्म में कलश पूजन और कलश स्थापना का अपना एक अलग ही महत्व होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना गया है। विशेष मांगलिक कार्यों के शुभारंभ जैसे (गृह प्रवेश, व्यापार में नई खाते आरंभ करना, नवरात्रि, नववर्ष के समय, दीपावली पूजन के समय, दुर्गा पूजा आदि) के दौरान कलश स्थापना जरुरी माना जाता है।

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वहीं अगर हम कोई उत्सव करते हैं तो कलश स्थापना जरुर नहीं होती। लेकिन अगर हम कोई भी पूजा और अनुष्ठान आदि कर रहे हैं तो कलश की स्थापना करना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि कलश में सभी देवी-देवताओं का, सभी तीर्थों का वास माना जाता है। इसलिए इसके बिना हमारी सभी पूजा अधूरी मानी जाती हैं।

कलश की स्थापना हमें प्रत्येक पूजन के दौरान करनी होती है और उसके लिए हम सोने, चांदी, पीतल, तांबा और मिट्टी का कलश ले सकते हैं। पूजन में कलश स्थापना के लिए प्लास्टिक और स्टील का कलश आप ना लें।

वहीं कलश के अंदर एक हल्दी की गांठ, लौंग, इलायची, सुपारी, सिक्का, अक्षत, मिश्री और दूर्वा ले लें। वहीं अगर आप एकादशी पूजन के लिए कलश स्थापना करते हैं तो आपको कलश में डालने के लिए अक्षत के स्थान पर तिल भी लेने होते हैं। इसके अलावा कलश में और भी सामग्री डाली जाती हैं लेकिन ये चीजें कलश में डालना बहुत जरुरी होता है। तथा इसके साथ ही आप पंचपल्लव ले लें। यानि आम के पांच पत्ते अथवा आप अशोक के पांच पत्ते भी ले सकते हैं।

कई स्थानों पर बंच भी डाला जाता है। यानी कि आम की डाली को एक साथ ही कलश में डाला जाता है। इसके साथ ही आप कुछ पुष्प ले लें। एक कलावा ले लें और साथ ही जटा और पानी वाला एक नारियल भी लें। चुनरी, पीला कपड़ा या फिर आप एक लाल वस्त्र भी ले सकते हैं। इसके साथ ही आप थोड़ा गंगाजल और रोली भी ले लें।

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कलश स्थापना विधि (Kalash Sthapana Vidhi)

  1. सबसे पहले कलश के कंठ में आपको मौली बांधनी चाहिए।
  2. इसके बाद आप कलश के ऊपर एक स्वास्तिक बनाएं।
  3. आप आम के पत्तों के ऊपर भी रोली, कुमकुम और चंदन आदि से एक शुभ चिन्ह जरुर बनाएं।
  4. इसके बाद आप कलश के अंदर थोड़ा गंगाजल डालें और फिर बाद में उसे कंठ तक जल से भर दें।
  5. जल से कलश को भरने के बाद उसमें सभी सामग्री एक-एक करके डाल दें।
  6. कहीं-कहीं कलश में कच्चा दूध भी डाला जाता है तो आप जैसे आपके यहां होता है, वैसे ही कलश में सामग्री डालें।
  7. इसके बाद आपने जो पंच पल्लव लिए हैं उन्हें कलश के मुख पर लगा दें और उसके बाद एक पूर्ण पात्र कलश के मुख पर रख दें।
  8. पुर्ण पात्र में आप थोड़े से गेंहू, चावल या सप्तधान्य आदि भर कर रखें।
  9. इसके बाद आप नारियल का मुख अपनी तरफ करके पूर्ण पात्र के ऊपर मौली, चुनरी अथवा कोई वस्त्र आदि बांधकर रख दें।
  10. इसके बाद आप नारियल के ऊपर एक पुष्प रख दें।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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