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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के स्मरण मात्र से ही कट जाते हैं सब कष्ट , ऐसे करें पूजा

भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग अलग-अलग जगह विराजमान हैं। जिनकी महिमा शास्त्रों में बताई गई है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की महिमा विशेष है। यह महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है। मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और स्मरण करने मात्र से कष्ट दूर हो जाते हैं।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के स्मरण मात्र से ही कट जाते हैं सब कष्ट , ऐसे करें पूजा
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प्रतीकात्मक

भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग अलग-अलग जगह विराजमान हैं। जिनकी महिमा शास्त्रों में बताई गई है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की महिमा विशेष है। यह महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है। मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और स्मरण करने मात्र से कष्ट दूर हो जाते हैं।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे के पास सह्याद्रि पर्वत माला में स्थित है। भगवान शिव का यह छठा ज्योतिर्लिंग 'भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग' के नाम से जगत में प्रसिद्ध है। यह मंदिर 3,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव यहां पर निवास करते हैं।

ऐसे करें पूजन

सावन माह में भगवान शिव की करने का विधान धर्मशास्त्रों में बताया गया है। भगवान शिव के भीमाशंकर स्वरुप की पूजा करने से लोगों के सब पाप मिट जाते हैं। भगवान भीमाशंकर की पूजा में सामग्री में भाग, धतूरा, बिल्वपत्र, केशर, चंदन और जायफल, पंच मेवा, पंच मिठाई भगवान को अर्पित की जाती हैं।

भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं भगवान शिव

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग एक सिद्ध स्थान है। यहां जो भी भक्त सच्चे मान से अपनी प्रार्थना लेकर आता है। वह पूर्ण होती है। सावन के मास में इस ज्योतिर्लिंग का नाम लेने से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव और त्रिपुरासुर नाम के राक्षस के बीच घमासान युद्ध हुआ था, इस युद्ध में शिवजी ने राक्षस का वध कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि इस युद्ध से भयंकर गर्मी उत्पन्न हुई जिस कारण भीमा नदी सूख गई। इसके बाद भगवान शिव के शरीर से निकले पसीने से फिर से नदी जल मग्न हो गई। यह मंदिर नागर शैली में निर्मित है।

यूं पड़ा भीमाशंकर नाम

एक अन्य कथा के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख शिवपुराण में भी मिलता है। जिसके अनुसार कुंभकरण और कर्कटी का पुत्र भीम एक बहुत शक्तिशाली राक्षस था। जब भीम को पता चला कि उसके पिता का वध भगवान श्रीराम ने किया है तो वह उनसे बदला लेने के लिए आतुर हो गया। इसके लिए उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी भीम की तपस्या से प्रसन्न हो गए और उसे बहुत बलशाली होने का वरदान दे दिया।

इस वरदान से भीम और भीम के कृत्यों से उसे दौरान हर कोई भयभीत हो गया। यहां तक की देवी-देवता भी परेशान होने लगे। तब सभी देवी देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने भीम नाम के इस राक्षस से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। तब भगवान शिव ने भीम से युद्ध किया और इस युद्ध के दौरान भीम को भगवान शिव ने मार दिया।

इस प्रकार से भीम नाम के राक्षस से सभी को मुक्ति मिली। इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से इसी स्थान पर शिवलिंग रूप में निवास करने का आग्रह किया। जिसे शिवजी ने मानव कल्याण के लिए स्वीकार कर लिया। तब से भगवान शंकर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां विराजमान हैं।

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