Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Bhadli Navami 2021 : भड़ली नवमी आज, चार मास के लिए लगेगा विवाह और मांगलिक कार्यों पर ब्रेक

  • आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि को भड़ली नवमी का पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है।
  • देवशयनी एकादशी से पूर्व भड़ली नवमी के दिन से विवाह कार्यों पर ब्रेक लग जाता है।
  • भड़ली नवमी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जी की आराधना की जाती है।

Bhadli Navami 2021 : भड़ली नवमी आज, चार मास के लिए लगेगा विवाह और मांगलिक कार्यों पर ब्रेक
X

प्रतीकात्मक तस्वीर

Bhadli Navami 2021 : आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि को भड़ली नवमी का पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है। वहीं देवशयनी एकादशी से पूर्व भड़ली नवमी के दिन से विवाह कार्यों पर ब्रेक लग जाता है। भड़ली नवमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। भड़ली नवमी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जी की आराधना की जाती है। वहीं भड़ली नवमी को देश के अन्य कई हिस्सों में दूसरों रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि यानी भड़ली नवमी का बहुत अधिक महत्व है। उत्तर भारत में भड़ली नवमी को शादी-विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त का दिन माना जाता है। इस संबंध में यह मान्यता है कि जिन लोगों के विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकलता, उनका विवाह इस दिन किया जाए, तो उनका वैवाहिक जीवन हर तरह से संपन्न रहता है, उनके जीवन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता है।

ये भी पढ़ें : Sawan 2021 : सावन के पहले सोमवार को लग रहा सौभाग्य और शोभन योग, बिजनेस और मंगलकार्यों के लिए रहेगा लाभदायक

ज्योतिष के मुताबिक, यदि आपको शादी- विवाह का कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा है, तो भड़ली नवमी का दिन विवाह बंधन के लिए अति शुभ होता है। भड़ली नवमी पर पूरे दिन शुभ मुहूर्त होता है, ऐसे समय में आप किसी भी समय में विवाह बंधन में बंध सकते हैं। यह दिन इतना शुभ है कि इस दिन आप बिना मुहूर्त देखें गृह प्रवेश, नया वाहन और नए व्यापार का शुभारंभ कर सकते हैं।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जुलाई 2021 में शुभ मांगलिक विवाह के लिए भड़ली नवमी का दिन अंतिम मुहूर्त है, क्योंकि इसके बाद से भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में रहेंगे और विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि सभी मांगलिक कार्यों पर इस चार माह के लिए ब्रेक लग जाएंगे।

वहीं पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी से चातुर्मास माना जाता है जिसका अर्थ होता है कि भड़ली नवमी के बाद चार महीनों तक विवाह या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जा सकते, क्योंकि इस दौरान देवी-देवता सो जाते हैं। इसके चार माह बाद सीधे देवउठनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णुजी के जागने पर चातुर्मास समाप्त होता है तथा सभी तरह के शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं।

इस वर्ष देवशयनी एकादशी 20 जुलाई के दिन है। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे और चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा, इस वजह से इस अवधि में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

और पढ़ें
Next Story