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Jyotish Shastra : अपनी पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसे करें भगवान का पूजन, जानिए...

  • अपने घरों में पूजा-पाठ (Puja-path) सभी लोग करते हैं।
  • पूजा-अनुष्ठान आदि करें तो पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करें।
  • जिस प्रकार समय पर बुबाई की जाने पर फसल उचित मात्रा में पैदावार देती है, उसी प्रकार उचित समय पर की गई पूजा भी उचित फल प्रदान करती है।

Jyotish Shastra : अपनी पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसे करें भगवान का पूजन, जानिए...
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Jyotish Shastra : अपने घरों में पूजा-पाठ तो सभी लोग करते हैं लेकिन सभी लोगों को पूजा-पाठ आदि का उचित लाभ नहीं मिल पाता है क्योंकि लोग विधिविधान को छोड़कर अपनी-अपनी मति के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि श्रद्धावांल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः। ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति। अर्थात जितेन्द्रिय, साधन में रत और श्रद्धावान पुरुष ही ज्ञान को प्राप्त होता है और ज्ञान प्राप्ति से तत्काल ही वह परम शान्ति को प्राप्त हो जाता है। इसलिए जब भी आप कोई भी पूजा-अनुष्ठान आदि करें तो पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। जिससे आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो और आपके सभी कार्य अपने मन के अनुसार पूर्ण हो जाएं। जिस प्रकार समय पर बुबाई की जाने पर फसल उचित मात्रा में पैदावार देती है, उसी प्रकार उचित समय पर की गई पूजा भी उचित फल प्रदान करती है। तो आइए जानते हैं पंडित विजयपाल शास्त्री के अनुसार पूजा करने के समय, विधि और विधान के बारे में।

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  • आपको पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर अपना मुंह करके ही करनी चाहिए और अगर संभव हो तो पूजा प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8 बजे के दौरान ही करें।
  • पूजन हमेशा पृथ्वी पर आसन बिछाकर उसके ऊपर बैठकर ही करें, पूजाघर में प्रतिदिन नियम से प्रात:काल और संध्याकाल में एक घी का दीप और एक तेल का दीप जरुर जलाएं।
  • पूजा-अर्चना समाप्त होने के बाद पूजास्थल पर उसी स्थान पर खड़े होकर आपको तीन परिक्रमाएं अवश्य करनी चाहिए।
  • आपके पूजाघर में मूर्तियों की लंबाई 1, 3, 5, 7, 9, 11 इंच तक की होनी चाहिए। इससे बड़ी प्रतिमा आपके घर के पूजाघर में नहीं होनी चाहिए साथ ही गणेश जी, मां सरस्वतीजी और माता महालक्ष्मीजी, की प्रतिमाएं खड़े हुए आपको अपने घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए। इनकी प्रतिमा आपके घर में हमेशा बैठे हुए स्थिति में होनी चाहिए।
  • आप अपने घर के मंदिर में केवल प्रतिष्ठित प्रतिमाएं ही रखें। उपहार में मिली प्रतिमा, कांच की प्रतिमा, लकड़ी की प्रतिमा और फाइबर की प्रतिमा अपने घर में कभी न रखें और साथ ही खंडित प्रतिमा, जलीकटी फोटो और टूटा कांच भी अपने घर से तुरन्त ही हटा दें, ऐसी चीजें अमंगल का कारक हैं और इससे आपके घर में विपतियों का आगमन हो सकता है।
  • अपने घर के मंदिर के ऊपर भगवान के वस्त्र, किताब-कापी और ज्वैलरी आदि कभी न रखें और घर के अपने स्वर्गीय माता-पिता व पित्रों की तस्वीर भी न रखें। पूजा करने के बाद मंदिर को पर्दा से ढक दें।
  • पूजा के पश्चात भगवान श्रीहरि विष्णु की चार, गणपति जी की तीन, सूर्यदेव की सात, मां भगवती दुर्गा की एक एवं शिवलिंग की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।
  • सभी लोगों को अपने घर में पूजास्थल पर कलश जरुर स्थापित करना चाहिए। कलश जल से भरकर और श्रीफल से युक्त विधि विधान से स्थापित करें। अगर आपके घर में कलश पर रखें श्रीफल में कपोलें फूटने लगती हैं तो आपके घर में सुख-समृद्धि के संग स्वयं माता महालक्ष्मी श्रीहरि नारायण के संग निवास करती हैं।
  • अपने घर को हमेशा मकड़ी के जाले और दीमक से बचाएं बरना आपके घर में धन हानि की संभावना हो सकती है।
  • अपने घर में प्रतिदिन कपूर का एक छोटा टुकड़ा अवश्य जलाए, इससे घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है।

(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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