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Aashan Mas 2020:आषाढ़ मास में पड़ेंगे ये महत्वपूर्ण त्योहार और व्रत, जानिए

Aashan Mas 2020: साल 2020 में आषाढ़ मास 6 जून से शुरू होकर 5 जुलाई गुरू पुर्णिमा के दिन समाप्त होगा। इस महीने में दो ग्रहण है जिसमें से बड़ा सूर्यग्रहण है। अगर आप नहीं जानते हैं कि आषाढ़ मास में कौन कौन से व्रत और त्योहार पढ़ रहे हैं तो हम आज आपको बताएंगे।

Aashan Mas 2020:आषाढ़ मास में पड़ेंगे ये महत्वपूर्ण त्योहार और व्रत, जानिए
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आषाढ़ मास 2020 व्रत और त्योहार

Aashan Mas 2020: शास्त्रों में आषाढ़ मास का बहुत महत्व बताया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार साल का चौथा महीना आषाढ़ होता है। वर्षा ऋतु का आगमन और आषाढ़ मास की शुरुआत लगभग एक साथ ही होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक जून या जुलाई में आषाढ़ का महीना पड़ता है। साल 2020 में आषाढ़ मास 6 जून से शुरू होकर 5 जुलाई गुरू पुर्णिमा के दिन समाप्त होगा। इस महीने में दो ग्रहण है जिसमें से बड़ा सूर्यग्रहण है। अगर आप नहीं जानते हैं कि आषाढ़ मास में कौन कौन से व्रत और त्योहार पढ़ रहे हैं तो हम आज आपको बताएंगे।

योगिनी एकादशी

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। यह तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस बार योगिनी एकादशी 16 या 17 जून बुधवार को है।

मासिक शिवरात्रि

हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। 20 जून को मासिक शिवरात्रि व्रत है।

आषाढ़ अमावस्या

अमावस्या बहुत ही पवित्र तिथि मानी जाती है। विशेष कर दान, पून्य, स्नान, पित्र कर्म आदि के लिए बहुत ही पून्य फलदायी होती है। आषाढ़ मास की अमावस्या 21 जून रविवार को है। आषाढ़ अमावस्या को सूर्यग्रहण पड़ेगा। इसलिए अमावस्या के पित्र कार्य 20 जून शनिवार को किए जाएंगे। यह दर्श अमावस्या कहलाएगी।

सूर्यग्रहण

साल 2020 में भारत में दिखाई देने वाला एकमात्र सूर्यग्रहण 21 जून रविवार को लगेगा। यह ग्रहण 21 जून को सुबह 9 बजकर 15 से प्रारंभ हो जाएगा। इस ग्रहण का परमग्रास 99.4 प्रतिशत रहेगा यानि कुछ स्थानों पर सूर्य पूरी तरह छिप जाएगा। यह ग्रहण करीब 5 घंटे 48 मिनट 3 सेकेंड का होगा। यह बड़ा सूर्यग्रहण है।

गुप्त नवरात्रि

हर साल चार नवरात्रि आती है। साल की पहली नवरात्रि चत्र मास के शुक्ल पक्ष में आरंभ होती है। जिसे वसंती नवरात्रि कहते हैं। दूसरी नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष से आरंभ होती है, जिसे सर्दीय नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि के अलावा भी साल में दो नवरात्रि आती है। जिन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। पहली गुप्त नवरात्रि माघ मास में आती है और दूसरी आषाढ़ मास में आती है। इन दोनों गुप्त नवरात्रियों का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 22 जून से शुरू होगी।

जगन्नाथ यात्रा

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दुतीया तिथि से भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है। इसमें भगवान श्री कृष्ण माता सुभद्रा व बलराम के पुष्य नक्षत्र में रथ उत्सव निकाला जाता है।

मासिक दुर्गा अष्ठमी

हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्ठमी को दुर्गा अष्ठमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन श्रदयालु दुगा की पूजा करते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। आषाढ़ मास की दुर्गा अष्ठमी 28 जून रविवार को है।

देवशयनी एकादशी

देवशयनी एकादशी बहुत ही खास एकादशी है। इस दिन से धर्म कर्म काम ज्यादा तेजी से होगा। देवशयनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चातुर्मास के लिए सो जाते हैं और देव उठनी एकादशी पर जगते हैं। इस बार देवशयनी एकादशी 1 जुलाई बुधवार की है।

गुरू पूर्णिमा

आषाढ़ पूर्णिमा का दिन सबसे खास माना जाता है। इस दिन को गुरू पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। इसे महापर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार गुरू पूर्णिमा 5 जुलाई रविवार के दिन है। पूर्णिमा व्रत 4 जुलाई को रखा जाएगा। 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण है। यह धूप छाया का चंद्रग्रहण है इसलिए इसका कोई सूतक काल नहीं होगा।

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