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हरियाणा
एक माह से बंद पड़ा खनन कार्य : बाहरी राज्यों के श्रमिकों के सामने संकट, पलायन शुरू

 खनन शुरू करवाए जाने को लेकर चर्चा करते हुए क्रेशर यूनियन के पदाधिकारी। 

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एक माह से बंद पड़ा खनन कार्य : बाहरी राज्यों के श्रमिकों के सामने संकट, पलायन शुरू

Ashwani kumar
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19 Dec 2021 7:01 AM GMT

क्रेशर संचालकों व पहाड़ ठेकेदारों ने दावा किया कि सभी संचालक सोमवार को उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन देकर प्रदेश सरकार से अपील करेंगे कि पिछले सप्ताह हुई बरसात के बाद प्रदूषण की धुंध भी साफ हो गई है इसीलिए पहाड़ खनन कार्य संचालन की स्वीकृति देनी चाहिए।

हरिभूमि न्यूज: बाढड़ा

गांव पिचौपा कलां खनन क्षेत्र में क्रेशर यूनियन दादरी की जिला इकाई ने आपात बैठक आयोजित कर प्रदूषण की आड़ में बंद पड़े पहाड़ी खनन व पत्थर पिसाई कार्य को दोबारा शुरू करवाने की मांग की। क्रेशर संचालकों व पहाड़ ठेकेदारों ने दावा किया कि सभी संचालक सोमवार को उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन देकर प्रदेश सरकार से अपील करेंगे कि पिछले सप्ताह हुई बरसात के बाद प्रदूषण की धुंध भी साफ हो गई है इसीलिए पहाड़ खनन कार्य संचालन की स्वीकृति देनी चाहिए और सरकार चाहे तो शहरी कारखानों की तर्ज पर पांच दिन पिसाई का काम करने का तुरंत फैसला ले क्योंकि इनके बंद होने से लाखों श्रमिक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। सरकार ने जल्द कोई फैसला नहीं लिया तो क्रेशर संचालक राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।

दादरी स्टोन क्रेशर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष सोमबीर सिंह घसौला ने पिचौपा कलां खनन क्षेत्र में स्टोन क्रेशर एसोसिएशन अध्यक्ष विजय सांगवान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदूषण का स्तर बढने से पिछले एक माह से सभी क्रेशरों की बिजली आपूर्ति बाधित है और पत्थर पिसाई पूरी तरह प्रतिबंध है। अब दो दिन पूर्व हुई मामूली बरसात के बाद मौसम मे पूरी तरह साफ वातावरण होने व प्रदूषण के स्तर में गिरावट से अब सरकार को इन क्रेशरों के बारे में तुरंत विचार करना चाहिए। केन्द्र व प्रदेश सरकारों ने शहरों के समीप स्थित कारखानों को आड इन वन या सप्ताह में पांच दिन संचालन करने की स्वीकृति दे दी है जबकी उनके कामकाज को अब भी बाधित कर रखा है।

बिरही जोन अध्यक्ष जयभगवान व महेश अटेला ने कहा कि क्रेशर इकाइयां ठप होने से लाखों बेरोजगार युवाओं को दो समय का खाना भी मुश्किल हो गया वहीं लंबे समय तक काम बंद होने से बाहरी राज्यों के श्रमिकों का पलायन शुरु हो गया है। यह क्रेशर क्षेत्र के गरीब तबके के बेरोजगारों द्वारा बैंकों से महंगे ब्याज पर ऋणों के द्वारा संचालित किए जा रहे हैं वहीं अब प्रदूषण की आड़ में क्रेशर प्लांट बंद होने से उनको बैंकों की किश्तें व बिजली बिलों की बिना खर्च किए एवरेज स्तर पर भुगतान करना मजबूरी बन गया है जो न्याय संगत नहीं है। पहाड़ी खननन व क्रेशर संचालन बंद होने से अकेले इन पर नहीं बल्कि प्रत्येक आमजन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और गरीब आदमी को महंगाई की मार में पीसना पड़ रहा है। क्रेशरों पर पत्थर, क्रेशर, रोड़ी न मिलने से प्रदेश के बड़े बड़े प्रोजेक्टों की आपूर्ति बंद है वहीं पड़ोसी राज्य राजस्थान से कम गुणवत्ता का पत्थर जो आमजन निर्माण सामग्री के लिए महंगे दामों पर प्रयोग करने को मजबूर हैं।

उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रदूषण स्तर में कमी के कारण तुरंत पुराने तर्ज पर संचालन करने या फिर सरकार चाहे तो शहरी कारखानों की तर्ज पर आड इन वन या सप्ताह में पांच दिन काम करने का तुरंत फैसला ले क्योंकि इनके बंद होने से लाखों श्रमिक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। सभी पदाधिकारियों ने आपात बैठक में आगामी सोमवार को दादरी जिला मुख्यालय पहुंच कर उपायुक्त को ज्ञापन देने व उसके बाद आगामी फैसला लेने की रणनीति तैयार की।

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