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भारत में ब्लैकलिस्ट नहीं हुई ''अगस्ता-वेस्टलैंड'' कंपनी: रक्षा मंत्रालय

वीवीआइपी हेलिकॉप्टर सौदे की कुल कीमत 3600 करोड़ रूपए थी।

भारत में ब्लैकलिस्ट नहीं हुई अगस्ता-वेस्टलैंड कंपनी: रक्षा मंत्रालय
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नई दिल्ली. वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे को लेकर जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि यूपीए सरकार के दौरान इस सौदे में शामिल अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी को कालीसूची में नहीं डाला गया था। उस वक्त कंपनी के साथ केवल 3600 करोड़ रूपए का 12 वीवीआईपी हेलिकाप्टरों की खरीद का सौदा रद्द किया गया था। साथ ही अगस्ता पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगाया गया था। इस आंशिक प्रतिबंध को 26 मई 2014 को एनडीए सरकार ने सत्ता में आने के बाद कंपनी द्वारा भारत में पहले से जारी उन सौदों पर से हटा दिया था। जिसमें अगस्ता की भूमिका प्राथमिक नहीं सैकेंण्डरी थी।
अदालती प्रक्रिया
मसलन किसी समझौते के तहत कंपनी द्वारा की जाने वाली अतिरिक्त पुर्जों की सप्लाई से लेकर मरम्मत इत्यादि के काम में मदद करना शामिल है। अदालती प्रक्रिया पूरी होने और उसके बाद सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने तक कंपनी भारत के साथ किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर सकती है। कंपनियों को कालीसूची में डालने की कोई प्रक्रिया मौजूद नहीं है। समझौते के दिशानिर्देंशों के हिसाब से अगर कोई कंपनी खरीद प्रक्रिया के मानकों का उल्लंधन करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। किसी कंपनी को कालीसूची में डालने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
आमंत्रित करने का निर्णय रक्षा मंत्रालय का नहीं था
फिनमैकेनिका और उसकी सहायक कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड को एरो इंडिया और डिफेंस एक्सपो में आमंत्रित करने का निर्णय रक्षा मंत्रालय का नहीं था। यह एक प्रकार की प्रदर्शनी होती है जिसमें कंपनी अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती है। इन उत्पादों की खरीददार केवल सरकार ही नहीं है। निजी कंपनियां भी इनके उत्पाद खरीदती हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2010 में हुए इस समझौते के तहत 12 वीवीआईपी हेलिकाप्टरों की खरीद की जानी थी। सौदे की कुल कीमत 3600 करोड़ रूपए थी। तीन हेलिकॉप्टर भारत आ चुके हैं। लेकिन अभी उनके उपयोग को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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